पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरोह के सरगना सुहेल समेत अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौशाद के अलावा मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें इस नेटवर्क से सुहेल ने जोड़ा था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर WhatsApp ग्रुप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।
सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर गुप्त कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग का एक्सेस पाकिस्तान में बैठे लोगों को दिया गया था, जिससे वे सीधे संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे थे।
50 सोलर कैमरे लगाने की थी साजिश
पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की योजना बना रहा था। कुछ स्थानों पर कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे। दिल्ली और सोनीपत में लगाए गए कैमरों को बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
जांच में यह भी पता चला कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और उसे कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद में दुकान खुलवाई गई थी। फिलहाल पुलिस इस जासूसी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि इसके तार देश और विदेश में किन-किन जगहों से जुड़े हैं।