मैच के बाद बिश्नोई ने कहा, “पिछला सीजन मुश्किल था, लेकिन मैंने अपनी प्रक्रिया पर टिके रहने की कोशिश की। मैं अपनी लेंथ मिस करता, तो मुझे छक्के पड़ जाते। यही मेरी एकमात्र कमजोरी थी। अगर मुझे लेंथ पर हिट पड़ती है, तो कोई दिक्कत नहीं है। इस मैच में भी आपने देखा कि जब मैंने फुल लेंथ गेंदबाजी की, मुझे रन पड़े, लेकिन गुड लेंथ पर रन नहीं बने। इसके लिए मैंने मानसिक, शारीरिक और तकनीकी तौर पर काम किया है।”
बिश्नोई ने कहा, “राहुल तेवतिया का विकेट मेरे लिए अहम रहा। वह एक बेहतरीन फिनिशर के रूप में जाने जाते हैं। अगर वह आउट नहीं होते, तो मैच किसी भी तरफ जा सकता था।”
लेग स्पिनर ने जीत का श्रेय तुषार देशपांडे, जोफ्रा आर्चर के साथ ही पूरी टीम को दिया।
उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि टीम जीत गई। मेरे प्रदर्शन से ज्यादा तुषार ने आखिर में और जोफ्रा ने 19वें ओवर में जिस तरह से गेंदबाजी की, वह मायने रखता है। यह सबका मिलकर किया गया काम था और इसी वजह से हम जीते। हम एक युवा टीम हैं और आगे भी ऐसे ही खेलना चाहेंगे।”
रवि बिश्नोई ने 4 ओवर में 41 रन देकर 4 विकेट लिए।
मैच की बात करें तो आरआर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट पर 210 रन बनाए थे। जीटी ने 211 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार शुरुआत की थी और 8 ओवर में पहले विकेट के लिए 78 रन जोड़े। दूसरा विकेट 107 के स्कोर पर गिरा, लेकिन इसके बाद आरआर के गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेते हुए जीटी की रन गति पर अंकुश लगाया।
आखिरी 2 ओवरों में जीटी को जीत के लिए 15 रन चाहिए थे और 3 विकेट शेष थे। जोफ्रा आर्चर ने 19वें ओवर में मात्र 4 रन दिए। इसके बाद आखिरी ओवर में जीत के लिए 11 रन चाहिए थे। तुषार देशपांडे ने मात्र 4 रन दिए और टीम को 6 रन से जीत दिला दी। जीटी 20 ओवर में 8 विकेट पर 204 रन बना सकी।