काठमांडू। नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। उनके समर्थक अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर रिहाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच नेपाल सुपीम कोर्ट ने सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए गिरफ्तारी पर स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब के लिए तीन दिन का समय दिया है।
यह आदेश ओली की ओली की पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर याचिका पर आया। याचिका में गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तुरंत रिहाई की मांग की गई थी। हालांकि जस्टिस मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले स्वास्थ्य कारणों से जूझ रहे ओली ने काठमांडू जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी दी, जहां उनकी हिरासत पांच दिन और बढ़ा दी गई।
दरअसल ‘जेनजी आंदोलन’ के दौरान हुई 76 लोगों की मौत की जांच के लिए गठित Gauri Bahadur Karki Commission ने अपनी रिपोर्ट में कई नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए थे। नई सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में आयोग की सिफारिशें लागू कर दीं, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि आंदोलन के दौरान हिंसा की जानकारी न होने का दावा “आपराधिक लापरवाही” की श्रेणी में आ सकता है।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाद नेपाल में व्यापक विरोध शुरू हुआ था, जो बाद में देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में आगजनी और संसद भवन को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। राजनीतिक संकट के बाद अंतरिम व्यवस्था बनी और चुनाव कराए गए, जिसके बाद नई सरकार का गठन हुआ।
अब ओली की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर नेपाल की राजनीति गरमा गई है और अदालत के नोटिस से सरकार पर दबाव बढ़ गया है।