गोल्डन हेरोइजन कोई साधारण मिसाइल नहीं है; यह इजरायल की उस उन्नत सैन्य तकनीक का हिस्सा है जिसे उसने हमास और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच विशेष रूप से विकसित किया है। अक्टूबर 2024 में ईरान पर हमले से ठीक पहले लीक हुए अमेरिकी दस्तावेजों ने दुनिया को इस मिसाइल के वजूद से रूबरू कराया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक ऐसी मिसाइल है जिसे फाइटर जेट्स से हवा में ही दागा जा सकता है। इसकी मारक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी अनुमानित रेंज 1,500 से 2,000 किलोमीटर के बीच है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस रेंज के साथ भारतीय विमान बिना दुश्मन की सीमा में प्रवेश किए उनके गहरे ठिकानों को तबाह कर सकते हैं।
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ़्तार और भेदने की क्षमता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गोल्डन हेरोइजन गहरे भूमिगत बंकरों और भारी सुरक्षा वाले ढांचों को भी मिट्टी में मिलाने की शक्ति रखती है। जब इसे फाइटर जेट से छोड़ा जाता है, तो यह पहले एक निश्चित ऊंचाई तक बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र Trajectory का पालन करती है और फिर सीधे लक्ष्य पर काल बनकर गिरती है। अपने अंतिम चरण में इसकी गति 5 मैक ध्वनि की गति से पांच गुना से भी अधिक हो जाती है, जो इसे ‘हाइपरसोनिक’ श्रेणी के करीब खड़ा करती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की शान कही जाने वाली ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल की गति 2.8 मैक है। यानी गोल्डन हेरोइजन न केवल रफ़्तार में बल्कि मारक क्षमता में भी एक नया बेंचमार्क स्थापित करती है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह मिसाइल गेम-चेंजर साबित हो सकती है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल सुखोई-30 MKI Su-30MKI जैसे शक्तिशाली विमान इस मिसाइल को ढोने और दागने के लिए पूरी तरह अनुकूल बताए जा रहे हैं। पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के साथ बढ़ते सीमा विवादों के बीच, यह तकनीक भारत को एक ऐसा ‘स्टैंड-ऑफ’ लाभ देगी जिससे दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह नाकाम हो जाएगा। गाजा युद्ध में हमास के सुरंग नेटवर्क को ध्वस्त करने वाली इस तकनीक ने अपनी उपयोगिता पहले ही साबित कर दी है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से उम्मीद है कि रक्षा क्षेत्र में केवल हथियारों की खरीद ही नहीं, बल्कि तकनीक के हस्तांतरण Technology Transfer पर भी बात होगी। यदि गोल्डन हेरोइजन भारतीय शस्त्रागार का हिस्सा बनती है, तो यह न केवल भारत की मारक क्षमता को बढ़ाएगी बल्कि दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन को भी पूरी तरह भारत के पक्ष में झुका देगी। हालांकि, दुनिया की निगाहें अब नई दिल्ली और यरुशलम से आने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी हैं, लेकिन इतना साफ है कि यह दोस्ती आने वाले समय में दुश्मनों के लिए ‘काल’ साबित होने वाली है।