इस बंदी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री भी क्या छोड़ेंगे। बहुमत के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी है। ऐसे में समाजवादी समाजवादी बनने के बाद उनका सीएम पद बनना मुश्किल हो जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वह 30 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
इधर, इस घटना के बीच राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई है। कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक कोई भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। पार्टी और सहयोगी शास्त्र के बीच मठ जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा रिवर्सफर देखने को मिल सकता है।
इस बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। बांकीपुर सीट से विधायक रहे नितिन नबीन ने भी अपना पद छोड़ दिया है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनकी बर्खास्तगी के बाद यह सीट खाली हो गई और यहां नए अभ्यर्थियों की चर्चा तेजी से हुई। इस सीट के लिए संजय मयूख का नाम सबसे पहले बताया जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राजनीतिक सिद्धांतों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह कदम सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भी भूमिका हो सकती है। बिहार में गठबंधन की राजनीति और आगामी गठबंधन को देखते हुए इस फैसले से कई नए समीकरण पैदा हो सकते हैं। देखें, पूरे राज्य की नजर इस पर टिकी है कि अगले मुख्यमंत्री की बात कौन होगी और सत्ता की कमान उनके हाथों में होगी।