दिसपुर। असम विधानसभा चुनावों (Assam Assembly elections.) के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है। मतदान से महज कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के ‘गोमांस सेवन’ पर दिए गये बयान पर राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। सरमा ने कहा कि गोमांस खाने में कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे निजी जगहों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हम बस यही कहते हैं कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर दायरे में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से सियासी बवाल तेज हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा (BJP) की दोहरी नीति बता रहा है।
दरअसल, यह बयान मुख्यमंत्री के पिछले कई बयानों से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले जोरहाट में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय का मांस खाने वालों को वह नहीं बख्शेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने तब कहा था कि असम में पशु संरक्षण कानून है, सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने पर 3 साल की जेल हो सकती है। मैं गाय का मांस खाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराऊंगा।
विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा
मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, कि भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ। उन्होंने हिमंता के बयान वाला पोस्टर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने कहा कि ‘गाय माता’ भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी हथकंडा है, जिसका इस्तेमाल दंगे और अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। आप ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा और उसके समर्थक ‘ रक्षा’ के नाम पर हत्याएं करते हैं, वहीं असम के उनके नेता कह रहे हैं कि गोमांस खाओ लेकिन घर में।
पुराने बयान और कानून का प्रावधान
बता दें कि इस महीने के शुरू में हिमंता बिस्वा सरमा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग चौधरी पर गोमांस खाने और ‘राष्ट्र-विरोधी व सनातनी-विरोधी’ होने का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। एजेपी ने इन आरोपों को फर्जी और राजनीतिक साजिश बताया है।
असम पशु संरक्षण अधिनियम, 2021 गायों के वध पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, रेस्तरां और सामुदायिक कार्यक्रमों में गोमांस के सेवन पर प्रतिबंध है। राज्य में दुकानों से गोमांस खरीदा जा सकता है और निजी स्थानों पर इसका सेवन किया जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने होटलों और सार्वजनिक स्थानों में गोमांस पर और सख्ती की है।