मूल रूप से सीहोर जिले के आष्टा गोपालपुर के रहने वाले शैलेंद्र पिछले 6 महीनों से भोपाल की गोल्डन सिटी में किराए से रह रहे थे और रातीबड़ के ही एक प्राइवेट कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रहे थे। पुलिस के अनुसार शैलेंद्र के कमरे से मिले सुसाइड नोट में लिखा है मैं अपनी बीमारी से बहुत तंग आ चुका हूं… इसलिए अब जीना नहीं चाहता। मैं आप सभी से बहुत प्यार करता हूं कृपया अपना ध्यान रखें और स्वस्थ रहें।
हैरानी की बात यह है कि परिजनों ने शैलेंद्र को किसी भी तरह की ‘गंभीर’ बीमारी होने से इनकार किया है। भाई के मुताबिक शैलेंद्र अक्सर मामूली मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम और उसके बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी से परेशान रहते थे। हालांकि पुलिस जांच में एक और दुखद पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि शैलेंद्र की पत्नी ‘बच्चेदानी के कैंसर’ से जूझ रही हैं और पिछले एक साल से उनका इलाज चल रहा है। वर्तमान में पत्नी अपने मायके में रहकर उपचार करा रही हैं जिसे लेकर शैलेंद्र काफी समय से गहरे तनाव में थे।
जांच अधिकारी SI गब्बर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले की जांच मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों के नजरिए से भी कर रही है। यह घटना दर्शाती है कि कभी-कभी छोटी दिखने वाली शारीरिक समस्याएं और अपनों की बीमारी का बोझ एक व्यक्ति को भीतर से कितना कमजोर कर सकता है।