नई दिल्ली :बॉलीवुड के ‘झक्कास’ अभिनेता अनिल कपूर आज भले ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हों, लेकिन उनके करियर की नींव बेहद सादगी और संघर्ष के साथ पड़ी थी। हाल ही में गेमिंग रियलिटी शो ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ में अक्षय कुमार के साथ बातचीत के दौरान अनिल कपूर ने अपने जीवन के उन पन्नों को पलटा, जो आज की पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। अभिनेता ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पेशेवर सफर की शुरुआत साल 1976 में मुंबई के वर्ली स्थित दूरदर्शन स्टूडियो से हुई थी। उस समय एक छोटे से कार्यक्रम में परफॉर्म करने के बदले उन्हें पहली कमाई के रूप में मात्र 250 रुपये मिले थे। अनिल कपूर के लिए वह महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके हुनर पर लगी पहली मुहर थी, जिसने उन्हें भविष्य का सुपरस्टार बनने का आत्मविश्वास दिया।
अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए अनिल कपूर ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार एक नाटक में हिस्सा लिया, तो वहां मुख्य अतिथि के रूप में दिग्गज अभिनेता शशि कपूर मौजूद थे। अनिल की प्रतिभा से प्रभावित होकर शशि कपूर ने उन्हें ‘बेस्ट एक्टर’ की ट्रॉफी से नवाजा। उस पल को याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि महान कलाकार के हाथों मिले उस सम्मान ने ही उन्हें यकीन दिलाया कि वे अभिनय की दुनिया में लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकते हैं। हालांकि, अनिल आज भी अपने उस शुरुआती दौर की रिकॉर्डिंग तलाश रहे हैं, ताकि वे देख सकें कि पांच दशक पहले वे स्क्रीन पर कैसे दिखते और अभिनय करते थे, लेकिन अफसोस कि वह क्लिप अब तक नहीं मिल पाई है।
बातचीत का सिलसिला जब उनके करियर के सबसे प्रतिष्ठित गाने ‘धक-धक करने लगा’ पर पहुँचा, तो अनिल कपूर ने कई राज खोले। फिल्म ‘बेटा’ के इस कालजयी गाने को लेकर उन्होंने विनम्रता से कहा कि यह गाना पूरी तरह से माधुरी दीक्षित का है और उन्होंने केवल उनका साथ निभाया था। अक्षय कुमार के टोकने पर कि यह गाना दोनों की मेहनत का फल है, अनिल ने बताया कि इसकी शूटिंग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई थी। मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान के निर्देशन में आर.के. स्टूडियो में फिल्माए गए इस गाने की शूटिंग रातों में होती थी। उन दिनों अनिल और माधुरी दोनों ही दिन में दो-दो अलग फिल्मों की शूटिंग कर रहे थे और थकान के बावजूद रात भर जागकर ‘धक-धक’ गाने को पूरा किया गया। आज भी इस गाने में जो ऊर्जा और ताजगी नजर आती है, उसके पीछे उन सितारों की रातों की नींद और समर्पण छिपा है