नीम के औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए यह अभिषेक न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है। भक्तों ने इस मौके पर सुख शांति और निरोग जीवन की प्रार्थना की।
इसके साथ ही महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा के दिन मंदिर के शिखर पर ब्राह्मध्वज का भव्य ध्वजारोहण किया गया। यह परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल की लगभग 2000 साल पुरानी गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस पहल के तहत विक्रम संवत और ध्वज परंपरा को फिर से व्यापक स्वरूप दिया गया है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है बल्कि भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता और प्राचीन गौरव का प्रतीक भी माना जाता है। बाबा महाकाल के दरबार में नव संवत्सर की शुरुआत विशेष पूजा अभिषेक और ब्रह्मध्वज के साथ हुई जिससे श्रद्धालुओं में उल्लास और आस्था का माहौल बना रहा।