कच्चे तेल और वैश्विक हालात का असर
रुपये पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव है। खासतौर पर ईरान-अमेरिका तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 94.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था।
आम लोगों की जेब पर सीधा असर
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम आदमी पर पड़ेगा। जब रुपया गिरता है, तो आयात महंगा हो जाता है। भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, जिससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।
रोजमर्रा के खर्च में भी बढ़ोतरी
विदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स भी महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वालों को अब ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।