सट्टेबाजी पर लगाम के लिए RBI का बड़ा कदम
रुपए में बढ़ोतरी का मुख्य कारण RBI का वह निर्देश है, जिसमें बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी खुली स्थिति 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने को कहा गया है। केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों को साफ निर्देश दिया है कि वे दिन के अंत तक अपनी ऑनशोर स्थिति इसी सीमा के भीतर रखें।
साथ ही, सभी चालू बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे बाजार में डॉलर की अटकलों पर रोक गिल और रुपए को स्थिरता मिलेगी।
पहले गिरावट में था रुपया
गौरतलब है कि मार्च के दौरान वैश्विक तनाव के कारण रुपया 4 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो गया था। पिछले हफ़्ते यह करीब 94.84 के स्तर तक गिर गया था, जिससे बाज़ार में चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में RBI का यह कदम बाज़ार में भरोसा बहाल करने के लिए अहम माना जा रहा है।
कच्चे तेल की महंगाई बना दबाव
हालांकि रुपए पर अभी भी दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश की चिंता बढ़ गई है। महंगाई तेल महंगाई को बढ़ती है और इससे रुपए पर नेगेटिव असर पड़ता है।
वैश्विक तनाव और डॉलर की मांग
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, हूती विद्रोहियों की सक्रियता और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के चलते वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव पड़ता है।
आगे क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
विश्लेषकों का दबाव है कि RBI का यह कदम अल्पकाल में रुपए को सहारा देगा। डॉलर की बड़ी स्थिति कम होने से बाजार में संतुलन आएगा और रुपए में बढ़ोतरी बनी रह सकती है। हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो रुपए पर फिर से दबाव आ सकता है।