Rupnath Dham : कटनी। प्रकृति की गोद में बसा रूपनाथ धाम एक अनोखा तीर्थ स्थल है। यह जगह भगवान शिव की आस्था और सम्राट अशोक के ऐतिहासिक शिलालेखों का संगम है। कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील में स्थित यह धाम रहस्य और श्रद्धा से भरा है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक कहानियां हर किसी को आकर्षित करती हैं।
कटनी के रूपनाथ धाम में प्रकृति, आस्था और इतिहास एक साथ सांस लेते हैं। कल्पना कीजिए, पहाड़ी पर तीन रहस्यमयी कुंड, जिनका पानी कभी सूखता नहीं, एक गुफा में विराजमान भगवान शिव, और सम्राट अशोक के 2300 साल पुराने शिलालेख। यह जगह सिर्फ तीर्थ नहीं, बल्कि एक अनोखा रहस्यमयी खजाना है। कहते हैं, यहीं ठहरी थी भगवान शिव की बरात, और यहीं से शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। पढ़िए, रूपनाथ धाम की रोमांचक कहानी।
तीन कुंडों का रहस्य
रूपनाथ धाम की पहाड़ी पर तीन प्राकृतिक कुंड हैं। इन्हें राम कुंड, सीता कुंड और लक्ष्मण कुंड के नाम से जाना जाता है। खास बात यह है कि ये कुंड सालभर पानी से भरे रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि भगवान शिव की बरात ने यहां विश्राम किया था। बरातियों की प्यास बुझाने के लिए ही इन कुंडों का निर्माण हुआ। 300 से 400 मीटर ऊंची इस पहाड़ी पर झरनों के बीच प्रकृति का आनंद लेने भी लोग आते हैं।

भगवान शिव और गुफा का चमत्कार
रूपनाथ धाम में एक पंचलिंगी शिव प्रतिमा है, जिसे रूपनाथ शिव के नाम से पूजा जाता है। यह कैमोर पहाड़ियों के एक छोर पर बनी गुफा में विराजमान है। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती कई दिनों तक यहां रुके थे। इसलिए इस जगह का नाम रूपनाथ पड़ा। कुछ लोग कहते हैं कि इस गुफा से एक सुरंग जागेश्वर नाथ धाम तक जाती है। यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव इस सुरंग से होकर कटाव धाम की नदी में स्नान करने जाते थे।
सम्राट अशोक का ऐतिहासिक निशान
232 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक भी रूपनाथ धाम आए थे। उनके शिलालेख आज भी यहां की शिलाओं पर मौजूद हैं। ये शिलालेख पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैं। ये निशान अशोक के प्रवास और उनके द्वारा कराए गए निर्माणों का प्रमाण हैं। यह ऐतिहासिक महत्व रूपनाथ धाम को और खास बनाता है।
रूपनाथ धाम में मेला
हर साल 14 से 18 जनवरी तक रूपनाथ धाम में मेला लगता है। महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार को भी यहां विशेष आयोजन होते हैं। दूर-दूर से भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। मेले में उत्साह और भक्ति का अनोखा माहौल देखने को मिलता है।
कैसे पहुंचें रूपनाथ धाम?
रूपनाथ धाम कटनी जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर है। बहोरीबंद से यह केवल 7 किलोमीटर की दूरी पर मझौली रोड पर स्थित है। आप बचैया-सिहोरा मार्ग, बहोरीबंद-सिहोरा मार्ग या मझौली से रूपनाथ मार्ग के रास्ते यहां पहुंच सकते हैं। रेल से आने वालों के लिए कटनी से सलैया स्टेशन उतरकर बाकल-बहोरीबंद होते हुए रूपनाथ धाम पहुंचा जा सकता है।
रूपनाथ धाम प्रकृति, आस्था और इतिहास का अनोखा मेल है। यहां के कुंड, गुफा, शिव प्रतिमा और अशोक के शिलालेख इसे एक अविस्मरणीय स्थान बनाते हैं। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं या भगवान शिव के भक्त हैं, तो रूपनाथ धाम आपके लिए जरूर एक खास अनुभव होगा।