कंपनियों और विशेषज्ञों की चेतावनी
कॉनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस को बाजार से हटाने के गंभीर परिणाम अपरिहार्य हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने इसे खाड़ी तेल उत्पादकों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी करार देते हुए कहा कि ईरान ने होर्मुज को बंद कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना दिया है। स्वतंत्र विश्लेषक पॉल सैंकी ने स्थिति को 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के बाद सबसे गंभीर बताया।
एलएनजी आपूर्ति दबाव में
चेनीयर के सीईओ जैक फुस्को ने बताया कि कंपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही है, लेकिन अमेरिका से एशिया तक एलएनजी पहुंचाने में 28 दिन लगते हैं। ऐसे में कतर पर निर्भर एशियाई देशों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ वली नसर के अनुसार ईरान युद्धविराम नहीं बल्कि व्यापक समझौता चाहता है, जिसमें होर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।
पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा कि यह संघर्ष फिलहाल गतिरोध में है, लेकिन आगे बढ़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज से ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
तेल कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर
सीएनबीसी के अनुसार, युद्ध और तनाव बढ़ने के बीच तेल की कीमतें लगातार उछल रही हैं। 28 फरवरी को अमेरिकी कच्चा तेल 49% बढ़कर 99.64 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 55% बढ़कर 112.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।
सरकारें सुरक्षित कर रही हैं अपना भंडार
टोटलएनर्जी के सीईओ पैट्रिक पुइयाने ने कहा कि जेट फ्यूल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल और डीज़ल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। रूस और चीन ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जबकि थाईलैंड में पेट्रोल राशनिंग शुरू हो गई है। अप्रैल तक यूरोप में भी कमी का असर दिखाई दे सकता है।
खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर
पॉल सैंकी ने चेतावनी दी है कि यह संकट खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को चुनौती दे सकता है। इराक, कतर, यूएई और संभावित रूप से सऊदी अरब की जीडीपी में 30% तक गिरावट आ सकती है। जिम मैटिस ने कहा कि अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों से बिना परामर्श युद्ध शुरू किया और अब इससे आसानी से बाहर नहीं निकल सकता। उन्होंने जोर दिया कि इस युद्ध के अंत का फैसला ईरान के हाथ में भी है।