आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र प्रदेश की राजधानी Bhopal सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। जूडा के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE के आधार पर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी लागू होनी थी और साथ ही लंबित एरियर का भुगतान भी किया जाना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि बार बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भुगतान और संशोधन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में देरी केवल आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि इसका असर उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय तक ड्यूटी करने और मरीजों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्हें अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है।
जूडा के अनुसार विरोध की शुरुआत काली पट्टी बांधकर काम करने से की गई है ताकि मरीजों की सेवा भी जारी रहे और सरकार तक उनकी आवाज भी पहुंचे। इसके बाद रविवार को डॉक्टर जस्टिस मार्च निकालेंगे जिसमें बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य शासन और प्रशासन को यह संदेश देना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब इस पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।
डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसमें ओपीडी रूटीन चेकअप और सामान्य चिकित्सा सेवाएं शामिल होंगी। हालांकि जूडा ने भरोसा दिलाया है कि इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भी जूनियर डॉक्टर इसी मुद्दे को लेकर विरोध जता चुके हैं लेकिन स्टाइपेंड संशोधन का मामला अब भी अटका हुआ है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।