Supreme Court : मध्यप्रदेश सहित 12 राज्यों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) पर भारी बोझ डाल दिया है। इस दबाव को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को अतिरिक्त स्टाफ तैनात करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोमेल्या बागची की बेंच ने गुरुवार को तमिलनाडु की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BLOs के काम के घंटे घटाने के लिए राज्य सरकारें जरूरी कार्यबल मुहैया कराएं।
कोर्ट ने तीन मुख्य निर्देश जारी किए (Supreme Court):
SIR ड्यूटी के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करें, ताकि मौजूदा BLOs का बोझ कम हो। स्वास्थ्य या व्यक्तिगत कारणों से छूट मांगने वालों के अनुरोधों पर केस-बाय-केस आधार पर विचार करें और तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करें। अगर कोई अन्य राहत न मिले तो प्रभावित व्यक्ति सीधे कोर्ट में आ सकते हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि अगर जरूरत पड़े तो SIR के लिए अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराए।” कोर्ट ने BLOs पर दबाव की गंभीरता को स्वीकार किया, खासकर जबरन ड्यूटी और समयसीमा के कारण हो रही परेशानियों को। TVK की याचिका में जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 32 के तहत BLOs पर आपराधिक कार्रवाई के खिलाफ चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा माना।
BLOs की कठिनाइयों का समाधान करें (Supreme Court) :
यह फैसला 35-40 BLOs के कथित आत्महत्याओं के बीच आया है, जो SIR के दबाव से जुड़ी बताई जा रही हैं। केरल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी इसी तरह की शिकायतें आई हैं। कोर्ट ने ECI को निर्देश दिया कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर BLOs की कठिनाइयों का समाधान करें। अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी। इस आदेश से मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, जहां BLOs पर भारी दबाव है। सरकार को अब अतिरिक्त स्टाफ लगाकर काम तेज करना होगा।