Mahakaushal Times

उज्जैन में कुडियाट्टम की अद्भुत प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध

उज्जैन। मध्य प्रदेश उज्जैन में विक्रम उत्सव अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह में सोमवार शाम प्रसिद्ध नाट्य प्रस्तुति ‘जटायूवधम्’ (कुडियाट्टम शैली) का प्रभावशाली मंचन किया गया। केरल के सुप्रसिद्ध कलाकार मार्गी मधु चाक्यार द्वारा प्रस्तुत इस शास्त्रीय रंगमंच ने अपनी पारंपरिक गरिमा,सशक्त भावाभिनय और सजीव मंच संयोजन से दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

कार्यक्रम पंडित सूर्यनारायण व्यास कला संकुल,कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित हुआ,जहां कला प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। प्रस्तुति में कुडियाट्टम की शास्त्रीय बारीकियों और अभिनय की सूक्ष्मता ने वातावरण को आध्यात्मिक और भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। निर्देशक मार्गी मधु चाक्यार,पद्मश्री मुझिक्कुलम कोच्चुकूटन चाक्यार के पुत्र और अम्मानूर माधव चाक्यार के भतीजे हैं। उन्हें रंगकर्म की समृद्ध परंपरा विरासत में मिली है। उनके मंडल ने भारत के साथ-साथ स्विट्जरलैंड,इटली,फ्रांस और दुबई के प्रतिष्ठित उत्सवों में भाग लिया है तथा जेरूसलम,सिंगापुर और येल विश्वविद्यालय (यूएसए) सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति दी है।

जटायु के बलिदान का गौरवशाली प्रसंग

नाटक में रामायण का अत्यंत भावुक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार रावण मायारूपी वेश में माता सीता का हरण कर ले जाता है।माता सीता के हाथ में भगवान श्री राम द्वारा दिया गया चूड़ामणि होता है,जिसके जादुई रत्न के रावण के स्पर्श में आते ही उसका मायारूप टूट जाता है,किंतु रावण को इसका आभास नहीं होता। माता सीता को संकट में देख वीर पक्षी जटायु सहायता के लिए आते हैं और रावण से भीषण युद्ध करते हैं। अंततः रावण छलपूर्वक जटायु का वध कर लंका की ओर प्रस्थान करता है। प्रस्तुति के इस चरम दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

विश्व की प्राचीन जीवित संस्कृत नाट्य परंपरा

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री भरत गुप्त (वाइस चेयरपर्सन,एनएसडी), आयुष गुप्ता मध्य प्रदेश के एक रेकी ग्रैंड मास्टर,योग प्रैक्टिशनर, राजेश कुशवाह (वरिष्ठ कार्य परिषद सदस्य,सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय), नरेश शर्मा (समाजसेवी) और संजू मालवीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर निर्देशक ने कहा कि कूडियाट्टम विश्व की सबसे पुरानी जीवित संस्कृत नाट्य परंपरा मानी जाती है,जिसे यूनेस्को की मान्यता भी प्राप्त है। केरल में विकसित यह कला एक हजार वर्षों से अधिक पुरानी है।

प्रस्तुत नाटक संस्कृत नाट्यकार शक्तिभद्र की रचना आश्चर्य चूड़ामणि के चतुर्थ अंक पर आधारित है,जिसमें जटायु के गौरवपूर्ण बलिदान का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। भाव,भंगिमा और परंपरा के अद्भुत संगम से सजी ‘जटायूवधम्’ की प्रस्तुति विक्रम उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही और दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर