डिजिटल भुगतान से पारदर्शी बनी व्यवस्था
ईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के जरिए भुगतान सीधे वेंडर्स और सेवा प्रदाताओं के खातों में रियल-टाइम में किया जाता है। यह सिस्टम पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जुड़ा हुआ है, जिससे पंचायत स्तर पर योजना बनाना, खर्च करना और उसका लेखा-जोखा रखना बेहद आसान हो गया है। इस डिजिटल प्रक्रिया ने नकद और कागजी लेन-देन की पुरानी व्यवस्था को काफी हद तक खत्म कर दिया है।
ग्राम पंचायतों में बढ़ी डिजिटल भागीदारी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में पंचायत राज संस्थाओं ने इस प्लेटफॉर्म के जरिए 53,342 करोड़ रुपए का ट्रांसफर किया। साथ ही 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं ऑनलाइन अपलोड कीं। देश की कुल 2.59 लाख पंचायत राज संस्थाएं इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं, जिनमें से 2.50 लाख से ज्यादा संस्थाओं ने डिजिटल भुगतान का उपयोग किया।
1.6 करोड़ से ज्यादा वेंडर्स जुड़े
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.6 करोड़ से ज्यादा वेंडर्स रजिस्टर हो चुके हैं। इससे यह साफ है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल नेटवर्क तेजी से मजबूत हो रहा है और भुगतान प्रक्रिया अधिक संगठित बन रही है।
‘सभासार’ टूल से मीटिंग्स हुईं स्मार्ट
डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करने के लिए एआई आधारित सभासार टूल भी अहम भूमिका निभा रहा है। यह वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक पर आधारित है, जो ग्राम सभाओं की कार्यवाही, उपस्थिति और फैसलों को अपने आप रिकॉर्ड कर लेता है। अगस्त 2025 में लॉन्च हुआ यह टूल अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो चुका है।
स्थानीय भाषाओं में बढ़ी भागीदारी
‘सभासार’ में अब असमिया, बोडो, डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, नेपाली, संथाली और सिंधी जैसी भाषाएं भी जोड़ी गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी बढ़ी है और ग्राम सभा की कार्यवाही को स्थानीय भाषा में रिकॉर्ड करना आसान हो गया है।
डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ी उपलब्धि
जनवरी 2026 तक 1.11 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतें ‘सभासार’ टूल का उपयोग कर चुकी हैं। यह ग्रामीण डिजिटल गवर्नेंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो पारदर्शिता और सुशासन को नई दिशा दे रही है।
सरकार का लक्ष्य: डिजिटल और समावेशी गांव
सरकार का मानना है कि ईग्रामस्वराज और ‘सभासार’ जैसे प्लेटफॉर्म ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है और लोगों की भागीदारी बढ़ी है।