यह फैसला देर शाम सुनाया गया और कोर्ट कक्ष में सन्नाटा छा गया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यदि ऐसे जघन्य अपराध में दोषी को कम दंड दिया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। इसलिए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 66, 70(1) और 103(1) के तहत दोषी पाते हुए प्रत्येक धारा में आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। इस प्रकार तीनों सजाएं मिलाकर आरोपी को तिहरा आजीवन कारावास अर्थात मृत्यु तक कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के वकील जाहिद अहमद के अनुसार घटना 23 मई 2025 की है। खालवा थाना क्षेत्र की रोशनी पुलिस चौकी को सूचना मिली थी कि शादी समारोह में गई एक महिला रात भर घर नहीं लौटी। अगली सुबह गांव की एक वृद्ध महिला ने उसे एक घर के पीछे खून से सने कपड़ों में जमीन पर पड़ा देखा। घर लाए जाने पर पीड़िता ने बताया कि गांव के ही हरिराम ने उसके साथ गलत काम किया है।
घटना की भयावहता यहीं समाप्त नहीं हुई। घर की अन्य महिलाओं ने देखा कि पीड़िता गंभीर रूप से घायल थी और उसके शरीर पर गहरे घाव थे। कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई, जिससे आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य मिले।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को एकत्रित कर अदालत में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने ठोस तर्कों और प्रमाणों के आधार पर आरोपी के अपराध को सिद्ध किया। न्यायालय ने भी अपने फैसले में कहा कि यह अपराध न केवल पीड़िता के प्रति बल्कि पूरे समाज के प्रति अत्यंत क्रूर कृत्य है।
इस फैसले को जिले में न्याय की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि ऐसे कठोर निर्णय ही समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करते हैं और अपराधियों में भय पैदा करते हैं।
खंडवा में आए इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। यह निर्णय न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कानून से बड़ा कोई नहीं।