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इस दिन से खुलेगा केदारनाथ का कपाट, जानिए 6 महीने क्यों बंद रहता है मंदिर


नई दिल्ली। केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Dham) जो भगवान शिव का एक प्राचीन और प्रमुख तीर्थस्थल है, हर साल लगभग यहां लाखों लोग आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। अब मंदिर की यात्रा शुरू होने वाली है यानि इसका कपाट खुलने जा रहा है। आपको बता दें कि, ये मंदिर हर 6 महीने बंद रहता है। इस दौरान भक्तगण बाबा केदारनाथ के दर्शन ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में कर सकते हैं।

इस कारण बंद रहता हैं मंदिर
केदारनाथ मंदिर के बंद होने का मुख्य कारण है भारी बर्फबारी और मौसम की कठिनाइयाँ, जो नवंबर से मई तक रहती हैं। इस दौरान मंदिर और आसपास के क्षेत्र में भारी बर्फबारी हो जाती है और रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं, जिससे तीर्थयात्रियों का पहुंचना असंभव हो जाता है।

मौसम की यह चुनौती न केवल यात्रियों के लिए जोखिमपूर्ण होती है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना मुश्किल कर देती है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, शीतकालीन महीनों में रास्तों पर हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए मंदिर को बंद करना अनिवार्य हो जाता है।

भाई दूज के दिन ही बंद होते हैं केदारनाथ मंदिर के कपाट
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने की एक तिथि भी तय होती है। इसी तिथि में मंदिर के कपाट खोले और बंद किए जाते हैं। बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी हर भाई दूज यानी दिवाली के दो दिन बाद बंद कर दिए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ हिमालय पहुंचे जहां उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने यहीं पर अपने पितरों का तर्पण किया है। इसके बाद ही उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। कहते हैं कि जिस दिन पांडवों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया था वो भाई दूज का ही दिन था, इसलिए तब से इसी दिन केदारनाथ के कपाट बंद होने लगे।

एक और वजह
दूसरी वजह यह है कि भैया दूज के दिन से ही शीतकाल का आरंभ होता है। इस दौरान हिमालय क्षेत्र में रहना बहुत मुश्किल होता है। दरअसल, शीतकाल के समय हिमालय में जबरदस्त बर्फबारी होती है। इन कारणों से भी भैया दूज के बाद बाबा केदारनाथ के दर्शन रोक दिए जाते हैं और मंदिर के कपाट अगले 6 महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

इस दिन खुलेगा कपाट
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने ही वाले हैं। उत्तराखंड में इस समय सरकार चार धाम यात्रा की तैयारियों में जुटी हुई है। इस वर्ष केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। हालांकि, गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ ही प्रदेश की पवित्र चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने हैं।

केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए
Kedarnath Temple तक पहुंचना अपने आप में एक आध्यात्मिक और रोमांचक यात्रा है। इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए सबसे पहले श्रद्धालुओं कोहरिद्वार/ऋषिकेश पहुंचना होता है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा बस या टैक्सी के जरिए सोनप्रयाग तक सफर किया जाता है।

सोनप्रयाग से आगे का रास्ता और भी दिलचस्प हो जाता है। यहां से छोटी गाड़ियों के माध्यम से यात्रियों को गौरीकुंड पहुंचाया जाता है, जो केदारनाथ यात्रा का मुख्य बेस कैंप है। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16-18 किलोमीटर का ट्रेक शुरू होता है। यह रास्ता पहाड़ों, झरनों और हरियाली से भरपूर होता है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देता है।

गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक
इस ट्रेक को पैदल तय कर सकते हैं या फिर घोड़ा, खच्चर और पालकी का सहारा ले सकते हैं। वहीं, जो लोग कम समय में यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है, जिससे वे सीधे मंदिर के पास पहुंच सकते हैं।

केदारनाथ धाम जाने की प्रमुख तिथिया
अक्षय तृतीया: इसी दिन केदारनाथ के कपाट खोले जाते हैं।
श्रावण मास: भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय होता है ।
भैया दूज: इस दिन मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं।

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