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कम उम्र में बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा खराब लाइफस्टाइल और अनकंट्रोल शुगर जिम्मेदार


नई दिल्ली:आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें किडनी की बीमारियां सबसे चिंताजनक मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शरीर में बिना किसी स्पष्ट संकेत के धीरे धीरे विकसित होती रहती हैं। यही वजह है कि इन्हें साइलेंट किलर भी कहा जाता है। जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं तब तक कई बार बीमारी काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी होती है।

देश में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ये दोनों ही समस्याएं किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण मानी जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है तो उसे नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। समय पर जांच से बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव हो सकता है।

नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उपेंद्र सिंह के अनुसार पिछले दो से तीन वर्षों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में भी किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे सेडेंटरी लाइफस्टाइल अत्यधिक तनाव शरीर में पानी की कमी और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक क्रॉनिक किडनी डिजीज और किडनी स्टोन के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। क्रॉनिक किडनी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे धीरे शरीर को प्रभावित करती है। कई मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब यह बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है और किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर आज भी किडनी रोग के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीजों में इन दोनों में से एक या दोनों समस्याएं मौजूद होती हैं। इसके अलावा दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के जिम सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेना शरीर में पानी की कमी और खराब जीवनशैली भी किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण बन रहे हैं।

कई मामलों में बीमारी की देर से पहचान होने के कारण मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ जाती है जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। हालांकि समय रहते सावधानी बरती जाए तो किडनी की बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पैरों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे पेशाब में झाग आए पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव महसूस हो या लगातार थकान और भूख में कमी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा उल्टी आना जी मिचलाना या अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना भी किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट क्रिएटिनिन टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना नमक का सेवन सीमित करना धूम्रपान से दूर रहना और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

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