हथेली में अनामिका उंगली के नीचे के भाग को सूर्य पर्वत कहा जाता है और यहीं से ऊपर की ओर जाने वाली रेखा सूर्य रेखा कहलाती है। यदि यह रेखा साफ सीधी और बिना किसी रुकावट के दिखाई दे तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसे लोग जीवन में कम प्रयासों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल करते हैं। इन्हें समाज में मान सम्मान और पहचान आसानी से मिल जाती है और कई बार यह सफलता उन्हें विरासत या अचानक अवसरों के माध्यम से प्राप्त होती है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य को तेज यश और प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य पर्वत उभरा हुआ हो और उस पर स्पष्ट रेखा हो तो यह संकेत देता है कि वह व्यक्ति समाज में उच्च स्थान प्राप्त करेगा। ऐसे लोग जहां भी जाते हैं अपनी अलग पहचान बनाते हैं और अपने व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करते हैं।
कुछ लोगों की हथेली में सूर्य रेखा दोहरी होती है यानी दो समानांतर रेखाएं दिखाई देती हैं। यह स्थिति बेहद शुभ मानी जाती है और इसे राजयोग के समान माना जाता है। ऐसे व्यक्ति नेतृत्व क्षमता में निपुण होते हैं और प्रशासनिक या सरकारी क्षेत्र में ऊंचे पद तक पहुंच सकते हैं। इनके अंदर निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और ये जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल करने में सफल रहते हैं।
वहीं यदि सूर्य रेखा से शाखाएं निकलकर मध्यमा और कनिष्ठा उंगली की ओर जाती हैं तो यह असाधारण बुद्धिमत्ता का संकेत माना जाता है। ऐसे लोग तर्क शक्ति और संवाद कला में माहिर होते हैं। उनकी बातों में ऐसा प्रभाव होता है कि लोग आसानी से उनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं और उनकी बातों को गंभीरता से लेते हैं।
सबसे खास और दुर्लभ स्थिति तब मानी जाती है जब सूर्य रेखा पर या उसके पास स्वास्तिक का चिह्न बना हो। यह चिन्ह अत्यंत शुभ और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में धन दौलत सुख सुविधा और सम्मान की कभी कमी नहीं होती। यह संकेत देता है कि व्यक्ति हर कठिनाई से उबरकर सफलता के शिखर तक पहुंचेगा और उसे जीवन में विशेष संरक्षण प्राप्त रहेगा।
इस प्रकार सूर्य रेखा केवल एक साधारण रेखा नहीं बल्कि जीवन की दिशा और दशा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। हालांकि सफलता के लिए मेहनत और सही निर्णय भी उतने ही जरूरी हैं लेकिन यदि भाग्य का साथ मिल जाए तो जीवन की राह आसान हो जाती है।