Tiger Crisis in Madhya Pradesh : भोपाल। देश का “टाइगर स्टेट” मध्यप्रदेश इस साल बाघों की मौतों से सुर्खियों में है। केंद्र सरकार द्वारा बाघ संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद 2025 में अब तक 55 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई जा रही है। यह आंकड़ा वन्यजीव संरक्षण और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे गंभीरता से लेते हुए वन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन ने कहा कि बाघ शावकों का सर्वाइवल रेट 50% से कम होता है, लेकिन शिकार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हाई अलर्ट जारी कर आदतन शिकारियों पर नजर रखी जा रही है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय शिकारी गिरफ्तार हुए हैं।
बांधवगढ़ पर फोकस :
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में मौतों की संख्या ज्यादा है। वन बल प्रमुख वीएन अम्बाडे ने सख्त रुख अपनाया है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
145 करोड़ की नई योजना :
मानव-बाघ द्वंद्व रोकने के लिए 145 करोड़ की योजना मंजूर हुई है। यह 2025-26 से 2027-28 तक चलेगी। 2018 में 526 बाघ थे, अब 785 हो गए हैं। आगामी गणना में और वृद्धि की उम्मीद है।
बाघों की बढ़ती संख्या के बावजूद मौतों का यह सिलसिला चिंता का विषय है। विभाग अब सिर्फ पत्राचार नहीं, बल्कि सख्त एक्शन पर फोकस कर रहा है। CM की रिपोर्ट मांग से कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। टाइगर स्टेट की यह तस्वीर संरक्षण की चुनौतियों को उजागर कर रही है।