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ट्रंप सरकार ने कथित यहूदी-विरोधी भेदभाव के मामले में Harvard University के खिलाफ शिकायत दर्ज की


नई दिल्ली अमेरिका में प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ कथित यहूदी-विरोधी भेदभाव के मामलों को लेकर शिकायत दर्ज की है। यह कदम महीनों से रुकी बातचीत के बाद उठाया गया है। मैसाचुसेट्स जिले के लिए संयुक्त राज्य जिला न्यायालय में याचिका दर्ज की गई है।

सरकार ने आरोप लगाया कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने यहूदियों और इजरायली छात्रों के नागरिक अधिकारों का उल्लंघन किया और उन्हें उनकी जाति या राष्ट्रीय मूल के आधार पर गंभीर आलोचना का सामना करना पड़ा। शिकायत में कहा गया है कि इससे छात्रों को शिक्षा में भाग लेने और शिक्षा से मिलने वाले लाभ से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।

सरकार का कहना है कि हार्वर्ड को यहूदी और इजरायली छात्रों के साथ संरक्षण की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय ने अपने नीतिगत विचारधारा और व्यवहार के माध्यम से यहूदियों और इजराइलियों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दिया।

जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से अमेरिकी सरकार ने कई पत्रिकाओं को चेतावनी दी थी कि यदि वे अपनी कंपनियों में बदलाव नहीं करते हैं, तो उनकी फंडिंग में कटौती की जाएगी। मुख्य संप्रदाय में यहूदी-विरोधी कहानियों को शामिल किया गया और कुछ अल्पसंख्यक अल्पसंख्यकों के लिए विशेष विविधता इनिशिएटिव्स को समाप्त किया गया।

हालाँकि, अप्रैल 2025 में हार्वर्ड ने इन अल्पाइन को खारिज कर दिया, जिसके बाद किआल प्रशासन ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय के लिए 2.2 मिलियन डॉलर के बहुवर्षीय अनुदान और 60 मिलियन डॉलर के बहुवर्षीय फ़ैक्ट्रीज़ को रेफ़्रिजरेटर कर दिया जाएगा।

साथ ही, फरवरी 2025 में विक्की ने कहा कि उनकी सरकार हार्वर्ड से 1 डॉलर का हर्जाना मांग रही है, तथाकथित यहूदी-विरोधी और भेदभावपूर्ण समुदायों के लिए वित्तीय जिम्मेदारी तय की जा सके।

यह मामला अमेरिका में शिक्षा की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर विवाद का केंद्र बन गया है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस कदम का प्रभाव न केवल हार्वर्ड बल्कि अन्य आईवी लीग और प्रमुख वैज्ञानिकों पर भी पड़ सकता है।

अल्पसंख्यक प्रशासन का रुख यह बताता है कि वह अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और अधिकारों को सुरक्षित करने के नाम पर व्यवसायों पर दबाव बना रही है। वहीं, विश्वविद्यालय की ओर से अनुपूरक को खारिज कर दिया गया है और उन्होंने कानूनी लड़ाई के संकेत दिए हैं।

इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि अकादमी के स्टूडियो, सरकारी फंडिंग और नागरिक अधिकार की सुरक्षा के एक कॉम्प्लेक्स और संवेदनशील तत्व बन गए हैं। अमेरिकी अदालतों में यह केस आने वाले महीनों में व्यापक बहस का कारण बन सकता है।

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