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'उस्ताद' का डिजिटल धमाका: 16 अप्रैल को ओटीटी पर दहाड़ेंगे पवन कल्याण, पांच भाषाओं में फिल्म देखने को तैयार फैंस।


नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा के ‘पावर स्टार’ पवन कल्याण के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित एक्शन ड्रामा ‘उस्ताद भगत सिंह’ अब सिनेमाघरों में अपना जौहर दिखाने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर धमाका करने के लिए तैयार है। फिल्म की रिलीज को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन दर्शकों की भारी मांग और डिजिटल राइट्स की डील के बाद मेकर्स ने इसके प्रीमियर की आधिकारिक तारीख 16 अप्रैल तय कर दी है। सबसे खास बात यह है कि यह फिल्म केवल अपनी मूल भाषा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे हिंदी, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और तमिल सहित पांच प्रमुख भाषाओं में स्ट्रीम किया जाएगा।

बॉक्स ऑफिस पर ‘धमाकेदार’ शुरुआत और ‘धीमी’ रफ्तार
‘उस्ताद भगत सिंह’ का सिनेमाई सफर किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। 19 मार्च को जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर उतरी, तो इसने बॉक्स ऑफिस पर सुनामी ला दी थी। पहले ही दिन 34.75 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कलेक्शन कर पवन कल्याण ने अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया। हालांकि, जैसे-जैसे दिन बीतते गए, फिल्म की कमाई की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। 150 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में बनी इस फिल्म ने वैश्विक स्तर पर अब तक लगभग 96.36 करोड़ रुपये का ही कारोबार किया है। लागत वसूलने में मिली चुनौतियों के बीच, मेकर्स ने अब डिजिटल माध्यम के जरिए दुनिया भर के उन दर्शकों तक पहुंचने का फैसला किया है जो थिएटर तक नहीं पहुंच सके थे।

साहसी पुलिसिया तेवर और हैरतअंगेज एक्शन
फिल्म की कहानी एक ऐसे निडर और जांबाज पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपनी वर्दी की गरिमा और समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। 54 वर्ष की आयु में भी पवन कल्याण ने जिस ऊर्जा और फुर्ती के साथ एक्शन दृश्यों को अंजाम दिया है, वह युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। निर्देशक हरीश शंकर ने फिल्म में केवल मारधाड़ ही नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक संदेश और भावनात्मक संबंधों को भी पिरोया है। पवन कल्याण का रौद्र रूप और उनके डायलॉग डिलीवरी का अंदाज प्रशंसकों के बीच पहले ही चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे अब घर बैठे मोबाइल और टीवी स्क्रीन पर देखा जा सकेगा।

निर्देशक का विजन: सिनेमा प्रतियोगिता नहीं, उत्सव है
फिल्म की कमाई और दूसरी फिल्मों से प्रतिस्पर्धा को लेकर निर्देशक हरीश शंकर का नजरिया बेहद स्पष्ट और सराहनीय रहा है। उन्होंने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनके लिए फिल्म बनाना या उसे रिलीज करना किसी दूसरी फिल्म से मुकाबला करना नहीं है, बल्कि यह सिनेमा का एक उत्सव है। उन्होंने ‘धुरंधर-2’ जैसी फिल्मों के साथ क्लैश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि त्योहारों के मौके पर कई फिल्में रिलीज होती हैं और हर फिल्म की अपनी जगह होती है। उनके अनुसार, ‘उस्ताद भगत सिंह’ का उद्देश्य दर्शकों को एक उच्च स्तर का मनोरंजन प्रदान करना है, और ओटीटी रिलीज इसी कड़ी का अगला विस्तार है।

डिजिटल प्रीमियर से नई उम्मीदें

मनोरंजन जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उस्ताद भगत सिंह’ जैसी बड़ी फिल्म का इतनी जल्दी ओटीटी पर आना डिजिटल मार्केट की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। नेटफ्लिक्स जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म पर बहुभाषी रिलीज से फिल्म को न केवल दक्षिण भारत में, बल्कि उत्तर भारत और विदेशी बाजारों में भी नई जान मिलने की उम्मीद है। फिल्म की टीम को विश्वास है कि जो जादू थिएटर में अधूरा रह गया था, वह डिजिटल स्क्रीन पर जरूर पूरा होगा। अब 16 अप्रैल का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, जब पवन कल्याण का ‘उस्ताद’ अवतार एक बार फिर दर्शकों के दिलों की धड़कनें तेज करने आ रहा है।

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