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नागपुर में उपराष्ट्रपति का पहला कदम संघ की प्रेरणा और निस्वार्थ सेवा पर जोर


महाराष्ट्र उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का महाराष्ट्र दौरा कई मायनों में विशेष रहा जहां उन्होंने नागपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए देश और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया यह दौरा उनके उपराष्ट्रपति बनने के बाद राज्य का पहला आधिकारिक दौरा था जिससे इसे और अधिक महत्व मिला

नागपुर पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और नागपुर नगर निगम की मेयर नीता राजेंद्र ठाकरे सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया इस स्वागत ने उनके दौरे को गरिमामय शुरुआत दी

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और सभी के सुख समृद्धि की कामना की उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराएं और सांस्कृतिक मूल्य हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और समाज को एकजुट रखते हैं

उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके होने के कारण नागपुर आना उनके लिए घर वापसी जैसा अनुभव है यह शहर केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी देश में विशेष स्थान रखता है

उपराष्ट्रपति ने नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने यहां संघ की स्थापना की थी उन्होंने कहा कि संघ ने समाज में सेवा समर्पण और अनुशासन की भावना को मजबूत किया है और उनका स्वयं का जुड़ाव भी इस विचारधारा से रहा है जिससे उन्हें निस्वार्थ सेवा का संस्कार मिला

दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने डॉ हेडगेवार स्मृति भवन पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों के विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं

अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का अभिवादन किया जिनमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवासु वरेकेडी भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक वासुदेव जोशी और अन्य प्रमुख लोग शामिल थे

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि उन्हें जीवन में जो भी जिम्मेदारियां मिली हैं उन्होंने हमेशा उन्हें निस्वार्थ भाव से निभाने का प्रयास किया है और यही भावना राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है उनका यह संदेश स्पष्ट करता है कि सेवा और समर्पण ही समाज को आगे ले जाने की सबसे बड़ी शक्ति है

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