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पाक-अफगान सीमा पर युद्ध जैसे हालात: गिलगित-बाल्टिस्तान में ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी, तालिबान का 55 पाक सैनिकों को मारने का दावा


नई दिल्ली  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमावर्ती विवाद अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए पाकिस्तान प्रशासन ने पाक अधिकृत कश्मीर PoKके गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में नागरिक ड्रोन उड़ानों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के निर्देश पर लागू किए गए इस आदेश के तहत, अब इस संवेदनशील इलाके में किसी भी निजी या व्यावसायिक ड्रोन का उपयोग कानूनी अपराध माना जाएगा। गिलगित-बाल्टिस्तान पुलिस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि केवल कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को ही अपने पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की अनुमति होगी। यह कदम उस समय उठाया गया है जब सीमा पार से ड्रोन के दुरुपयोग और जासूसी की आशंकाएं चरम पर हैं।

दूसरी ओर, सीमा पर स्थिति तब और बिगड़ गई जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने रात भर चले विशेष सैन्य ऑपरेशनों में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। तालिबान द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ये हमले विवादित डूरंड लाइन के साथ सटे पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुन्नर और नूरिस्तान जैसे प्रांतों में किए गए। तालिबान का दावा है कि इस कार्रवाई के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी सेना के 2 बेस और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह ऑपरेशन ‘इस्लामिक अमीरात’ के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के सीधे आदेश पर चलाया गया, जिसे उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए कथित उकसावे का करारा जवाब बताया है।

हालांकि, पाकिस्तान ने तालिबान के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के भीतर कई संदिग्ध ठिकानों पर हवाई हमले Air Strikesकिए हैं, जिसमें सैकड़ों तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। दोनों पक्षों की ओर से किए जा रहे दावों में भारी विसंगति है, जिससे जमीनी हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय से डूरंड लाइन और टीटीपी TTPजैसे आतंकी समूहों को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन मौजूदा सैन्य संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। जानकारों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता और कूटनीतिक रास्तों के बजाय सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता दी, तो यह छिटपुट संघर्ष दक्षिण एशिया में एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल, गिलगित-बाल्टिस्तान में ड्रोन पर लगी पाबंदी और सीमा पर बढ़ती हलचल इस बात का संकेत है कि आने वाले दिन सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।

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