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मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी में ट्रंप, ईरान को लेकर क्या है अगला कदम?


नई दिल्ली। अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। हाल ही में इजरायली हमले में ईरान के सुरक्षा सचिव अली लारीजानी की मौत के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडिल-ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ट्रंप आगामी रणनीति के तहत हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती कर सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिका की स्थिति को और मजबूत करना है।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि प्रशासन मिडिल-ईस्ट में चल रहे अभियानों को मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर सैनिक भेजने की योजना पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप ने फिलहाल जमीनी सेना भेजने का फैसला नहीं किया है लेकिन सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।

बताया जा रहा है कि अतिरिक्त सैन्य तैनाती के जरिए अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। इसके लिए हवाई और नौसैनिक संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है साथ ही ईरान की तटरेखा के पास जमीनी सैनिकों की तैनाती भी संभव है।

इसके अलावा अमेरिकी अधिकारी ईरान के खार्ग द्वीप पर भी नजर बनाए हुए हैं जहां से देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है। हालांकि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई को बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है क्योंकि ईरान मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इसे आसानी से निशाना बना सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ईरान के यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण पाने की रणनीति भी बना रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कोई भी ऑपरेशन अमेरिकी विशेष बलों के लिए काफी कठिन और खतरनाक साबित हो सकता है।

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