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जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड


मुंबई। बॉलीवुड का 90 का दशक न केवल अपनी सुपरहिट फिल्मों के लिए जाना जाता है बल्कि उस दौर के कलाकारों के बीच की सादगी और अटूट भरोसे के लिए भी याद किया जाता है। उस समय की मशहूर और बेहद ग्लैमरस अभिनेत्री ममता कुलकर्णी भले ही आज फिल्मी दुनिया की चकाचौंध को त्याग कर आध्यात्म की राह पर चल पड़ी हों, लेकिन हाल ही में उनके एक बयान ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। ममता कुलकर्णी ने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ अपने उस दौर के रिश्तों का खुलासा किया है, जो आज के ‘वैनिटी वैन’ कल्चर वाले दौर में थोड़ा हैरान करने वाला लग सकता है।

ममता कुलकर्णी ने उस दौर की अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि पहले का समय आज जैसा नहीं था। आज जहाँ सितारों के पास आलीशान वैनिटी वैन्स होती हैं और वे सेट पर अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं, 90 के दशक में कलाकारों के बीच एक पारिवारिक माहौल हुआ करता था। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘बाजी’ (1995) की शूटिंग के दौरान आमिर खान और उनके बीच इतनी सहजता थी कि वे अक्सर एक-दूसरे के घरों का उपयोग व्यक्तिगत जरूरतों के लिए करते थे।

ममता ने एक बेहद निजी वाकया याद करते हुए कहा उन दिनों हमारे पास वैनिटी वैन की लग्जरी नहीं थी। मुझे आज भी याद है कि फिल्म की शूटिंग के वक्त आमिर खान अक्सर मेरे घर आया करते थे। वे बिना किसी झिझक के मेरे बेडरूम का इस्तेमाल अपने कपड़े बदलने और कॉस्ट्यूम चेंज करने के लिए करते थे। आमिर को मेरे बेडरूम में कपड़े बदलते देख न तो मुझे कभी असहजता हुई और न ही उन्हें।” यह खुलासा न केवल आमिर खान की सादगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि उस समय सह-कलाकारों के बीच कितना गहरा विश्वास और मर्यादा का रिश्ता हुआ करता था।

सिर्फ बेडरूम ही नहीं आमिर खान ममता के किचन तक में अपनी पहुंच रखते थे। ममता बताती हैं कि काम खत्म होने के बाद या शूटिंग के ब्रेक के दौरान आमिर खुद किचन में जाकर चाय बनाते थे। उनके बीच किसी भी प्रकार का ‘स्टारडम’ का पर्दा नहीं था। वे एक-दूसरे के साथ एक आम दोस्त की तरह वक्त बिताते थे। ममता के अनुसार, आमिर खान हमेशा से ही बहुत जमीन से जुड़े हुए इंसान रहे हैं और उनका यह व्यवहार उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी।

हालांकि वर्तमान समय पर बात करते हुए ममता कुलकर्णी थोड़ी भावुक और गंभीर भी नजर आईं। उन्होंने फिल्म जगत में आए बदलावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज तकनीक और चमक-धमक तो बढ़ गई हैॉ लेकिन सादगी और वास्तविक हुनर कहीं पीछे छूट गया है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज कई प्रतिभाशाली सिंगर्स और कलाकार काम की तलाश में घर बैठे हैं, क्योंकि अब इंडस्ट्री में रिश्तों की गर्माहट की जगह प्रोफेशनल दिखावे ने ले ली है। ममता के इन खुलासों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 90 के दशक का बॉलीवुड भले ही संसाधनों में कम रहा हो, लेकिन रिश्तों और भरोसे के मामले में वह आज से कहीं अधिक समृद्ध था।

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