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जहां सुकून और डर साथ रहते हैं, 1986 की त्रासदी से जुड़ी है इस झील की कहानी


नई दिल्ली दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगती हैं, लेकिन उनके अंदर खतरनाक रहस्य भी पाए जाते हैं। न्योस झील ऐसी ही एक झील है, जो अपनी प्राकृतिक प्रकृति के साथ-साथ संकटग्रस्त इतिहास के लिए भी जानी जाती है। अफ्रीकी देश कैमरून में स्थित यह झील के लिए भी रहस्य बनी हुई है।

1986: जब लेक ने उगला डेथ का बादल देखा
21 अगस्त 1986 की रात इतिहास की सबसे रहस्यमय प्राकृतिक घटनाएँ दर्ज हैं। उस दिन इस झील से अचानक निकला आसमानी गैस का बादल, जिसने आसपास के लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।

करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की आबादी वाले इस गैस क्लाउड ने करीब 1800 लोगों, 3500 लोगों और अनगिनत पक्षियों की जान ले ली। सबसे अजीब बात यह है कि लोग सोते-सोते ही दम तोड़ गए और उन्हें कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला।

क्या है ‘लिमनिक विस्फोट’ का रहस्य?
इस घटना को लिमनिक विस्फोट का नाम दिया गया है। असल में, यह झील एक वैज्ञानिक क्रेटर में बनी है, जहां नीचे मौजूद मैग्मा कांसॉली कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।

यह गैस झील की गहराई में जमा होता है और जब दबाव अधिक बढ़ता है, तो अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकलता है। यह गैस हवा से भारी होती है, इसलिए जमीन के पास बहती है और ऑक्सीजन की जगह ले जाती है, जिससे सांस लेना असंभव हो जाता है।

राक्षसों के बीच बसी है यह खतरनाक झील
लेक न्योस उत्तर-पश्चिमी कैमरून के ओकू आर्किटेक्चर क्षेत्र में स्थित है। यह एक क्रेटर झील है, जो टोकरा विस्फोट से बने पानी के दावे से बनी है। झील की गहराई में मौजूद गैस का लगातार जमाव इसमें दुनिया की सबसे खतरनाक झीलें शामिल हैं। यहां की जमीन और प्राकृतिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह प्राकृतिक खतरे हमेशा के लिए बरकरार है।

गेन ने कैसे किया खतरनाक को कम
1986 की घटना के बाद इस खतरे को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया। वर्ष 2001 में यहां ‘डीगैसिंग सिस्टम’ का आविष्कार किया गया, जिसके माध्यम से पाइपों के माध्यम से गैस को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। इसके बाद 2011 में दो और पाइपलाइन लगाए गए, जिससे गैस पर नियंत्रण हो गया। अब झील से गैस धीरे-धीरे-धीमी गहराई पर बनी हुई है, जिससे बड़े विस्फोट की आशंका काफी हद तक कम हो गई है।

आज भी रहस्य और डॉक्टर का रहस्य है
आज भी न्योस झील देखने में शांत और सुंदर दिखती है, लेकिन इसके अंदर छिपा खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। वैज्ञानिक इस झील और अफ्रीका की अन्य झीलों पर नजर रख रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को बरकरार रखा जा सके।

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