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दुनिया का आखिरी तेल रूट बंद होने वाला है? हूतियों की चाल से बढ़ी ग्लोबल टेंशन

वाशिंगटन। हूती यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास के पहाड़ी इलाकों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह स्ट्रेट 32 किलोमीटर चौड़ा है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां से एशिया और यूरोप के बीच वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत गुजरता है।
अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध के महज एक महीने के बाद ही यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैलता जा रहा है और अब एक नया खतरनाक रूप ले चुका है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर तीसरी बार मिसाइल हमला किया है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान और लेबनान के हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर कतर एनर्जी के एक तेल टैंकर पर हमला बोल दिया। इस कार्रवाई के जरिए हूती समूह ने साफ संदेश दिया है कि यह युद्ध अब सीमित नहीं रहने वाला है, और आने वाले समय में इसका असर व्यापक होने वाला है।

बता दें कि हूती को औपचारिक रूप से अंसार अल्लाह (ईश्वर के समर्थक) कहा जाता है, शिया इस्लाम की जैदी शाखा से जुड़े हैं। अरब स्प्रिंग के बाद से उन्होंने यमन की राजधानी सना और लाल सागर के अधिकांश तटीय इलाकों पर नियंत्रण बनाए रखा है। वे पहले भी दो बड़े अमेरिकी बमबारी अभियानों से बच निकले थे। पहला 2024 में बाइडेन प्रशासन के दौरान और दूसरा मार्च से मई 2025 के बीच डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में। ट्रंप ने अंत में उनके साथ समझौता किया था और अपनी खास स्पष्ट भाषा में कहा था कि आप कह सकते हैं कि उनमें बहुत साहस है।
युद्धकला में निपुण माने जाते हैं हूती

कहा जाता है कि ये लड़ाके युद्धकला में निपुण माने जाते हैं। उनके पास ड्रोन, जहाज-रोधी मिसाइलें हैं और उन्होंने पहले भी वैश्विक जहाजरानी को बाधित करने का रिकॉर्ड बनाया है। 2023 के अंत से 2025 की शुरुआत तक हूतियों ने गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में लाल सागर में 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले किए थे। वे ईरान के ‘प्रतिरोध अक्ष’ (Axis of Resistance) का हिस्सा हैं। एक ऐसा नेटवर्क जिसमें तेहरान हथियार, धन और समन्वय उपलब्ध कराता है। जब ईरान युद्ध में कूदता है, तो यह पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। पिछले शनिवार को ठीक कुछ ऐसा ही हुआ। हूतियों ने अपने मिसाइल हमले को ईरान और हिज्बुल्लाह के साथ संयुक्त सैन्य अभियान बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान, ईरान, इराक, वेस्ट बैंक और गाजा पर हमले जारी रहे तो और भी ज्यादा हिंसा होगी।

बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रखते हैं मजबूत पकड़

भौगोलिक रूप से हूती यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास के पहाड़ी इलाकों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह जलडमरूमध्य 26 से 32 किलोमीटर चौड़ा है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां से एशिया और यूरोप के बीच तेल, गैस, खाद्य पदार्थ, मशीनरी और कंटेनर माल समेत वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत गुजरता है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की स्थिति में सऊदी अरब ने पहले ही अपने कच्चे तेल को भूमिगत पाइपलाइनों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाना शुरू कर दिया था। मार्च में बाब अल-मंडेब रूट पर यातायात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई थी। अब हूती इस रास्ते को भी खतरे में डाल रहे हैं।

रायस्टैड एनर्जी के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही 50 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका ब्रेंट क्रूड, अगर बाब अल-मंडेब बंद हुआ तो 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकता है। वहीं एक हूती उपमंत्री ने सीएनएन से कहा कि जलडमरूमध्य को बंद करना ‘एक व्यवहार्य विकल्प’ है। एक ईरानी अधिकारी ने भी अल जजीरा को यही संकेत दिया। पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी ने कहा कि हूतियों को सिर्फ कुछ जहाजों पर गोली चलानी होगी और लाल सागर का पूरा वाणिज्यिक यातायात ठप हो जाएगा।
60 फीसदी तेल मिडिल ईस्ट से आता है

अगर ऐसा होता है तो एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला क्षेत्र है, क्योंकि यहां अपना 60 प्रतिशत तेल मध्य पूर्व से आता है। फिलीपींस ने पहले ही ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। दक्षिण कोरिया ने नागरिकों से पानी का कम इस्तेमाल करने की अपील की है। भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर संघीय उत्पाद शुल्क में भारी कटौती कर दी है। इसके बावजूद आर्थिक संकट तेजी से फैल रहा है।

इस बीच अमेरिका ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर जमीनी हमले की योजना बना रहा है।

अब तक उसने 850 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें दाग दी हैं, सऊदी अरब में अपना एक महत्वपूर्ण रडार विमान खो चुका है और उसके सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है। उसके कई सहयोगी देश खुले तौर पर इस युद्ध से दूरी बना रहे हैं। फ्रांस ने इसे अवैध करार देते हुए निंदा की है। ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन देने से इनकार कर दिया। स्पेन ने अमेरिकी हमलों के लिए अपने बंदरगाह और सैन्य अड्डे बंद कर दिए हैं। जर्मनी ने कहा कि इस बारे में उससे कभी परामर्श नहीं किया गया।

ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बढ़ते जा रहा है। शायद यही कारण है कि ट्रंप जल्द से जल्द से इस जंग को खत्म करना चाहते हैं। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि हम बहुत जल्द निकल जाएंगे… दो हफ्तों में, शायद तीन हफ्तों में।”जब उनसे पूछा गया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त करने के लिए क्या कोई कूटनीतिक समझौता जरूरी है, तो उन्होंने साफ कहा कि नहीं, ईरान को मेरे साथ कोई समझौता करने की जरूरत नहीं है।

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