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सिबिल स्कोर के बिना भी मिल सकेगा लोन, जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?


नई दिल्ली । देश में लाखों ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी बैंक से कर्ज नहीं लिया, इसलिए उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है। नतीजा यह होता है कि जब वे पहली बार लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सिबिल स्कोर न होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी नहीं मिलती। अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है।
बिना सिबिल स्कोर के लोन
क्या अब लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं रहेगा? केंद्र सरकार एक ऐसी नए सिस्टम पर काम कर रही है, जो देश के लाखों लोगों के लिए बैंकिंग के दरवाजे खोल सकती है। खासकर महिलाएं, ग्रामीण आबादी और वे लोग जिन्होंने कभी बैंक से लोन नहीं लिया, उन्हें इस पहल से बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्रेडिट स्कोरिंग फ्रेमवर्क विकसित करने पर विचार कर रही है, जिससे बिना पारंपरिक क्रेडिट इतिहास के भी ऋण मिल सके।

फिलहाल बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले उसका सिबिल स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री जांचते हैं। सिबिल जैसी क्रेडिट एजेंसियां पुराने लोन, समय पर भुगतान और डिफॉल्ट का रिकॉर्ड रखती हैं। जिन लोगों ने पहले कभी लोन नहीं लिया या जिनका कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें अक्सर न्यू टू क्रेडिट मानकर लोन से वंचित कर दिया जाता है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था पहली बार लोन लेने वालों के लिए एक बड़ी बाधा है।

AI आधारित क्रेडिट स्कोरिंग क्या करेगी?

नई योजना के तहत एआई और डेटा एनालिटिक्स की मदद से वैकल्पिक आंकड़ों के आधार पर व्यक्ति की क्रेडिट योग्यता आंकी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर नियमित बिजली-पानी के बिल का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज या डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड, बैंक खाते में लेनदेन का व्यवहार और सरकारी योजनाओं का लाभ। इन सभी डेटा को मिलाकर एक वैकल्पिक क्रेडिट प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी ऋण मिल सकेगा जिनका पारंपरिक सिबिल स्कोर नहीं है।

महिलाओं और ग्रामीण आबादी को मिलेगा फायदा

यह पहल खासकर महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों छोटे कारोबारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। इन वर्गों के पास आय का सोर्स तो होता है, लेकिन औपचारिक क्रेडिट इतिहास नहीं होता। नई प्रणाली उन्हें औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद करेगी।

बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या मतलब?
यदि यह ढांचा लागू होता है, तो बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर सकेंगे। साथ ही, वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।

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