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उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश: संतों ने 200 साल पुरानी परंपरा के तहत होली उत्सव की तैयारियां शुरू कीं



नई दिल्ली। उज्जैन की पवित्र नगरी में होली के अवसर पर शुक्रवार को श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश हुआ। करीब 10 साल बाद आयोजित इस पेशवाई में देशभर से आए संतों का ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच जोरदार स्वागत किया गया। यह आयोजन 200 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही परंपरा का हिस्सा है और इसे वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों से जोड़ा गया है।

देशभर के प्रमुख अखाड़ों के पंच-परमेश्वर संतों के रूप में उज्जैन पहुंचे। भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि और मुकामी देवी दास सहित निर्वाण संतों ने अखाड़े में प्रवेश किया। महंत सत्यानंद ने बताया कि आने वाले दिनों में और अधिक संत उज्जैन पहुंचेंगे, जो शहर और मेले की व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे।

नगर प्रवेश के दौरान संतों ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और देशभर में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। पेशवाई में शामिल साधु-संत और महंत पारंपरिक पोशाक और धार्मिक वाद्ययंत्रों के साथ नगर में यात्रा करते हुए दर्शकों का मन मोहते नजर आए। शहरवासियों ने अपने उत्साह और श्रद्धा के साथ संतों का स्वागत किया।

उज्जैन में 4 मार्च को पंच-परमेश्वर और अन्य साधु-संतों के लिए होली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा, जिसमें सभी संत पारंपरिक ढंग से हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेलेंगे। इस दौरान भक्तजन भी मंदिर परिसर में उपस्थित रहकर होली का आनंद लेंगे।

पंच-परमेश्वर परंपरा के अनुसार, अखाड़ों के सदस्य उन स्थलों का दौरा करते हैं, जहां कुंभ मेला आयोजित होने वाला होता है। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ मेला आयोजित होने के मद्देनजर संत आठ दिन तक यहां रहेंगे और साधु-संतों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। उज्जैन का कार्य पूर्ण होने के बाद वे नासिक रवाना होंगे, जहां भी कुंभ मेला आयोजित होगा।

इस भव्य नगर प्रवेश से उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और मजबूती मिली है। शहरवासियों में संतों के आगमन और होली उत्सव को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। पंच-परमेश्वर का यह नगर प्रवेश ना सिर्फ धार्मिक उत्सव है, बल्कि आने वाले सिंहस्थ मेले के सफल आयोजन की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर है।

उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य स्वागत और होली उत्सव इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराएं आज भी देशभर में जीवित हैं। संतों के मार्गदर्शन में आगामी मेले की तैयारियों से श्रद्धालु और नगरवासी समान रूप से लाभान्वित होंगे।

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