Mahakaushal Times

Report: भारत में 40% युवाओं को नहीं मिल पाती नौकरी… 1.1 करोड़ स्तानक हैं बेरोजगार


नई दिल्ली ।
देश (India) में 20 से 29 साल के 6.3 करोड़ स्नातकों में से 1.1 करोड़ बेरोजगार (Graduate Unemployment) हैं। चिंता की बात यह है कि बेरोजगार के रूप में पंजीकरण कराने के एक वर्ष के भीतर सिर्फ सात फीसदी स्नातकों को स्थायी वेतन वाली नौकरी (Job) मिल पाती है। हाल के वर्षों में स्नातकों की बढ़ती संख्या के कारण यह समस्या और बढ़ गई है।

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय (Azim Premji University) की ओर से जारी रिपोर्ट ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ के मुताबिक, देश में युवाओं (15-29 वर्ष) की उच्च शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, रोजगार से जुड़ी चुनौतियां अब भी कायम हैं। स्नातकों में बेरोजगारी दर उच्च बनी हुई है। 15 से 25 वर्ष के स्नातकों में बेरोजगारी दर करीब 40 फीसदी और 25 से 29 वर्ष की आयु वर्ग में 20 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्नातक युवाओं को आय के मामले में लाभ मिलता है और उनकी शुरुआती कमाई गैर-स्नातकों के मुकाबले लगभग दोगुनी होती है। इसके बावजूद 2011 के बाद युवा पुरुष स्नातकों के वेतन में वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी है। रिपोर्ट की मुख्य लेखिका प्रोफेसर रोजा अब्राहम ने कहा, यह अध्ययन शिक्षा से रोजगार तक युवाओं की यात्रा और उसमें आए बदलावों को दर्शाता है।


पुरुषों की नामांकन दर में गिरावट

पिछले चार दशक में उच्च शिक्षा में नामांकन दर 28 फीसदी तक पहुंच गई है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी खासतौर पर बढ़ी है। हालांकि, पुरुषों के नामांकन में गिरावट आई है। यह 2017 के 38 फीसदी से घटकर 2024 के अंत तक 34 फीसदी रह गई है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि पुरुष परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए कमाने के मौके तलाशने लगते हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों का दायरा भी बढ़ा है। प्रति लाख युवाओं पर कॉलेज की संख्या 2010 के 29 से बढ़कर 2021 में 45 पहुंच गईं, जिसमें निजी संस्थानों की बड़ी भूमिका रही है।


गरीब परिवारों की उच्च शिक्षा में बढ़ी भागीदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षा में गरीब परिवारों की भागीदारी बढ़ी है, जो 2007 के आठ फीसदी से बढ़कर 2017 में 15 फीसदी हो गई है। लेकिन, आर्थिक बाधाएं अब भी बनी हुई हैं। महंगे पेशेवर पाठ्यक्रमों मसलन इंजीनियरिंग और मेडिकल में अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग के छात्र-छात्राओं की भागीदारी अधिक है। युवा तेजी से कृषि से हटकर सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2010 के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की संख्या में करीब 300 फीसदी की वृद्धि हुई है। साथ ही, निजी संस्थानों में गुणवत्ता को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर