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कोठी विवाद में डॉ. गोविंद सिंह का जवाब, धरना प्रदर्शन पर उठे सवालों का खंडन


भिंड । लहार विधानसभा क्षेत्र में कोठी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विधायक अम्बरीश शर्मा के धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह पर लगाए गए सरकारी रास्ते पर अवैध निर्माण के आरोपों को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। इस मामले में डॉ. गोविंद सिंह ने सख्त शब्दों में पलटवार किया और कहा कि उनके ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और तथ्यों से परे हैं।

डॉ. गोविंद सिंह ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर उनके बेटे और भाई के नाम से कोठी बनी हुई है यदि यह सरकारी रास्ते पर बनी साबित होती है तो वह स्वयं अपने हाथों से रास्ता खुलवा देंगे। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में उन्होंने कभी कोई गलत कार्य नहीं किया है और न ही ऐसे किसी कार्य का समर्थन करेंगे। उन्होंने तात्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए बताया कि सर्वे गलत तरीके से कराया गया। उनके अनुसार दो अलग-अलग सर्वे रिपोर्ट सामने आई हैं जिनमें पहली रिपोर्ट को बदलकर दूसरी तैयार की गई जो कई सवाल खड़े करती है।

डॉ. सिंह ने विधायक अम्बरीश शर्मा की भाषा शैली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का उपयोग करना उचित नहीं है। विधायक द्वारा जेसीबी से खुद कोठी तोड़ने की बात कहना उनके दबंगई रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें कोर्ट से स्टे मिला हुआ है। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आदेश दिए हैं ऐसे में धरना प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश न्यायोचित नहीं है। डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि यह लड़ाई अदालत में लड़ी जा रही है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

वहीं विधायक अम्बरीश शर्मा ने अपने धरना प्रदर्शन के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि लहार स्थित डॉ. गोविंद सिंह की कोठी उस स्थान पर बनी है जहां से दलित और पिछड़ा वर्ग की बस्ती मझतौरा मोहल्ला का सरकारी रास्ता निकलता है। उन्होंने दावा किया कि इस रास्ते का सर्वे नंबर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है और करीब डेढ़ साल पहले हुई प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि रास्ता कोठी के भीतर आता है।

विधायक ने कहा कि संबंधित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट और स्थानीय सिविल न्यायालय में अपना पक्ष रखा लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। एसडीएम कोर्ट ने भी दलित बस्ती के पक्ष में निर्णय देते हुए रास्ता खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी रास्ते पर अवैध रूप से कोठी का निर्माण कराया और मांग की कि निर्माण हटाकर बस्ती के लोगों के लिए रास्ता तुरंत खोला जाए।

इस विवाद ने इलाके में राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है। दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया है। डॉ. गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि वे हमेशा कानून और न्यायपालिका का पालन करते आए हैं और मामले का निपटारा अदालत के आदेशों के अनुसार होना चाहिए।

कोठी विवाद ने लहार विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही धरना प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी हो लेकिन डॉ. गोविंद सिंह ने यह साफ कर दिया है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

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