नई दिल्ली । हनुमान जयंती का पावन पर्व 2026 में 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन केवल भगवान हनुमान की भक्ति का ही नहीं, बल्कि उनकी अमरता और चिरंजीवी होने की मान्यता को भी स्मरण करने का अवसर होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसे सात महापुरुषों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें चिरंजीवी यानी अमर माना गया है और जिनके बारे में विश्वास है कि वे आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं।
कौन हैं 7 चिरंजीवी
धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, महाभारत और विष्णु पुराण में जिन सात चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है, वे हैं हनुमान, अश्वत्थामा, विभीषण, कृपाचार्य, राजा महाबली, वेद व्यास और परशुराम। इन सभी को अलग-अलग कारणों से अमरत्व का वरदान मिला और माना जाता है कि ये धर्म की रक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए आज भी सक्रिय हैं।
हनुमान जी: भक्ति और शक्ति का प्रतीक
हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। उनकी निष्ठा, शक्ति और सेवा भाव से प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद मिला। मान्यता है कि वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और संकट में उनकी मदद करते हैं।
अश्वत्थामा: अमरता जो बन गई श्राप
अश्वत्थामा महाभारत के एक शक्तिशाली योद्धा थे, लेकिन उन्हें मिला अमरत्व एक श्राप बन गया। भगवान कृष्ण के श्राप के अनुसार वे कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर भटकते रहेंगे।
राजा महाबली: दान और भक्ति का प्रतीक
राजा महाबली को उनकी दानशीलता के लिए जाना जाता है। भगवान विष्णु के वामन अवतार ने उनकी परीक्षा ली और प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। केरल का ओणम पर्व उन्हीं की स्मृति में मनाया जाता है।
वेद व्यास: ज्ञान के अमर स्रोत
वेद व्यास: ज्ञान के अमर स्रोत
वेद व्यास को महाभारत का रचयिता माना जाता है। उन्होंने वेदों को व्यवस्थित किया और उन्हें अमर ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
विभीषण: धर्म का साथ चुनने वाला
विभीषण ने अपने भाई रावण के खिलाफ जाकर धर्म का साथ दिया। भगवान राम ने उन्हें लंका का राजा बनाकर अमरत्व का आशीर्वाद दिया।
कृपाचार्य: ज्ञान और निष्ठा के प्रतीक
कृपाचार्य महाभारत काल के महान गुरु थे, जिन्हें उनकी विद्वता और निष्ठा के कारण चिरंजीवी माना जाता है।
परशुराम: विष्णु के अवतार
परशुराम भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। कहा जाता है कि वे कलियुग में कल्कि के गुरु बनेंगे और धर्म की स्थापना में मदद करेंगे।
क्या आज भी मौजूद हैं ये चिरंजीवी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये सभी चिरंजीवी आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आस्था के स्तर पर लोग इन्हें धर्म और सत्य की रक्षा करने वाला मानते हैं।
कहा जाता है कि कलियुग के अंत में ये सभी एक साथ प्रकट होंगे और भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि के साथ मिलकर अधर्म का नाश करेंगे।
कुल मिलाकर, 7 चिरंजीवियों की ये कथाएं केवल रहस्य ही नहीं, बल्कि भक्ति, सत्य, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने का गहरा संदेश भी देती हैं।