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कल मनाई जाएगी हनुमान जयंती, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


नई दिल्ली। हनुमान जयंती का पावन पर्व हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। हालांकि देश के कुछ क्षेत्रों में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी हनुमान जयंती मनाने की परंपरा है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर चैत्र पूर्णिमा को ही यह पर्व मनाया जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान हनुमान को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है। उन्होंने वानर रूप में जन्म लेकर अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित किया, इसलिए उन्हें राम भक्तों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

तिथि का समय

पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी।

पूजन के शुभ मुहूर्त

हनुमान जयंती पर इस बार पूजा के लिए दो विशेष मुहूर्त मिल रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6:10 बजे से 7:44 बजे तक रहेगा, जबकि दूसरा मुहूर्त शाम 6:39 बजे से रात 8:06 बजे तक है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

शुभ योग का संयोग

इस बार हनुमान जयंती पर ध्रुव योग और हस्त नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ध्रुव योग सूर्योदय से दोपहर 2:20 बजे तक रहेगा, इसके बाद व्याघात योग प्रारंभ होगा। वहीं हस्त नक्षत्र शाम 5:38 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

पूजा विधि

हनुमान जयंती के दिन प्रातः स्नान के बाद घर के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उन्हें विराजमान करें और गंगाजल से स्नान कराकर तिलक व अक्षत अर्पित करें। हनुमान जी को सिंदूर और घी चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ लाल फूल, जनेऊ और माला अर्पित करें। भोग में गुड़-चना और मौसमी फल जैसे केला, सेब या अंगूर चढ़ाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें और संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ भी करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।

हनुमान जयंती मंत्र
हनुमान जयंती के दिन पूजा और मंत्र जाप से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। एक प्रसिद्ध मंत्र है
“मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”

इस मंत्र में हनुमान जी के तेज, बल, बुद्धि और श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति का वर्णन किया गया है। मान्यता है कि कलियुग में भी हनुमान जी का अस्तित्व बना हुआ है और जहां राम कथा होती है, वहां उनकी उपस्थिति अवश्य रहती है।

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