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अमेरिका का चंद्र मिशन: 54 साल बाद चांद के करीब जाएंगे अंतरिक्ष यात्री, जानें पूरी तैयारी और उद्देश्य


नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगले कुछ वर्षों में चांद पर स्थायी बेस बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसी कड़ी में हाल ही में एजेंसी ने अगले दशक के चांद से जुड़े मिशनों का रोडमैप जारी किया। आर्टेमिस-2 मिशन इस योजना का हिस्सा है और इसे अप्रैल 2026 में लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के साथ लगभग 54 साल बाद अमेरिका एक बार फिर मानव को चांद के करीब भेजने जा रहा है।

आर्टेमिस-2 मिशन क्या है?

आर्टेमिस-2 नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम की दूसरी उड़ान है और यह लगभग 10 दिन का मानव मिशन होगा। इसके लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरायन अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल किया जाएगा। आर्टेमिस-1 मिशन 2022 में मानव रहित था, जो चांद के करीब स्थितियों का परीक्षण करने के लिए था। आर्टेमिस-2 में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाएंगे और यह उड़ान फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर होगी। इसका मतलब है कि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की मदद से यान स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर लौट आएगा। इस मिशन के दौरान चालक दल चंद्रमा के उस दूरस्थ हिस्से से गुजरेगा जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता और संभव है कि नए दूरी के रिकॉर्ड भी बनेंगे।

कौन हैं अंतरिक्ष यात्री?

नासा ने 3 अप्रैल 2023 को आर्टेमिस-2 के चार अंतरिक्ष यात्रियों का एलान किया था। इनमें कमांडर रीड वाइसमैन होंगे, जो नासा के अंतरिक्ष यात्री और अमेरिकी नौसेना के एविएटर तथा टेस्ट पायलट हैं। पायलट की भूमिका विक्टर ग्लोवर निभाएंगे, जो चंद्रमा का चक्कर लगाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। मिशन विशेषज्ञ के रूप में क्रिस्टीना कॉश शामिल हैं, जो सबसे लंबी महिला एकल अंतरिक्ष उड़ान का रिकॉर्ड रखती हैं और पहली महिला स्पेस वॉक में भी शामिल रही हैं। चौथे सदस्य जेरेमी हैनसेन कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी का प्रतिनिधित्व करेंगे और यह उनकी पहली अंतरिक्ष उड़ान होगी। इस मिशन में पहली बार कोई महिला, कोई अश्वेत और कोई कनाडाई नागरिक पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाएंगे।

लॉन्चिंग में देरी और तैयारी

मूल रूप से फरवरी 2026 में लॉन्चिंग की योजना थी, लेकिन रॉकेट परीक्षणों में समस्याओं के कारण इसे कई बार टालना पड़ा। अब नासा 1 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से इसे लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जो भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह होगा। यदि मौसम या तकनीकी कारण से लॉन्च संभव नहीं होता है, तो बैकअप तारीखें 3 से 6 अप्रैल और 30 अप्रैल रखी गई हैं।

मिशन की रूपरेखा

आर्टेमिस-2 मिशन के दौरान यान पहले पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होगा और यहां जीवन रक्षक प्रणालियों और अन्य तकनीकी उपकरणों की जांच की जाएगी। लगभग 26 घंटे बाद यान को बड़े इंजन बर्न के जरिए चंद्रमा की दिशा में भेजा जाएगा। इस यात्रा में चार दिन का समय लगेगा। यान चंद्रमा की सतह से लगभग 8,889 किमी ऊपर से गुजरेगा, जहां अंतरिक्ष यात्री लगभग तीन घंटे तक भूवैज्ञानिक और वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे, तस्वीरें लेंगे और अंतरिक्ष के मौसम, सौर ज्वालाओं और विकिरण की निगरानी करेंगे। यह उड़ान फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर आधारित होगी, जिससे यान स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर लौट आएगा। अंत में प्रशांत महासागर में ओरायन कैप्सूल सुरक्षित रूप से उतर जाएगा।

मिशन के लक्ष्य

आर्टेमिस-2 के प्रमुख लक्ष्य में चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, ओरायन यान और SLS रॉकेट के प्रदर्शन का परीक्षण करना, भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों की तैयारी करना और चंद्रमा की भूवैज्ञानिक संरचनाओं का अध्ययन करना शामिल है। इसके अलावा गहरे अंतरिक्ष के विकिरण और सौर ज्वालाओं के प्रभावों का भी अध्ययन किया जाएगा। इस मिशन की सफलता के बाद नासा चंद्रमा पर स्थायी मानव बेस स्थापित करने और भविष्य में इसे अंतरिक्ष स्टेशन की तरह निरंतर संचालन योग्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

क्यों नहीं उतरेगा आर्टेमिस-2 चांद पर?

हालांकि आर्टेमिस-2 मानव मिशन है, फिर भी यह चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा। इसका कारण यह है कि ओरायन यान लूनर लैंडर नहीं है और चांद पर उतरने की क्षमता नहीं रखता। चांद पर इंसानों की लैंडिंग आर्टेमिस-3 मिशन में होगी, जिसमें स्टारशिप एचएलएस लूनर लैंडर का इस्तेमाल किया जाएगा। आर्टेमिस-2 का उद्देश्य चंद्रमा के करीब मानव उड़ान और ओरायन यान की प्रणालियों का परीक्षण करना है, ताकि भविष्य में चांद पर स्थायी मानव मिशन और मंगल अभियान के लिए तैयारियां पूरी की जा सकें।

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