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लॉरेंस गैंग के सदस्य राजपाल ने नागदा में किया सरेंडर, फायरिंग की साजिश कबूली, कई बड़े मामलों से जुड़ा नाम

नागदा । मध्य प्रदेश के नागदा में कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े बदमाश राजपाल ने गुरुवार को अपने गांव रत्न्यखेड़ी में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर के दौरान उसने खरगोन के एक व्यापारी के घर पर फायरिंग करवाने की बात स्वीकार की।

राजपाल ने दावा किया कि जिस कारोबारी को निशाना बनाया गया, वह कथित रूप से छोटी बच्चियों पर गलत नजर रखता था और किसानों के साथ अत्याचार करता था। इसी कारण उसे सबक सिखाने के लिए यह वारदात कराई गई। उसने बताया कि पहले उसके साथियों ने हमला करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर ‘हैरी बॉक्सर’ नामक साथी के जरिए फायरिंग करवाई गई। राजपाल का नाम मोहाली स्थित पुलिस खुफिया मुख्यालय पर हुए मोहाली रॉकेट लॉन्चर हमला में भी सामने आ चुका है।

सरेंडर के दौरान राजपाल ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा था, जिसके चलते उसे यह कदम उठाना पड़ा। उसने यह भी कहा कि देशभर की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां और कई राज्यों की पुलिस उससे पहले भी पूछताछ कर चुकी हैं।

इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने भी राजपाल और उसके साथी योगेश भाटी को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। दोनों के नाम कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुके हैं, जिनमें आरोपी दीपक रंगा को पनाह देने का मामला भी शामिल है।

सरेंडर से पहले राजपाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गलत काम करने वालों को गैंग नहीं छोड़ेगा। उसने दावा किया कि वे प्रशासन की मदद करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। जिस फायरिंग का जिक्र राजपाल कर रहा है, वह 16 मार्च को हुई थी। खरगोन के व्यापारी दिलीप सिंह राठौड़ के घर पर तीन नकाबपोश बदमाशों ने गोलियां चलाई थीं। यह पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हुई थी और बाद में इसकी जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी।

राठौड़ परिवार के अनुसार, घटना के समय परिवार इंदौर में था, जबकि उनके पिता को अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल कर धमकियां दी गईं। व्हाट्सएप कॉल और वॉयस नोट के जरिए 10 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई और सबूत के तौर पर फायरिंग का वीडियो भी भेजा गया।

राजपाल रतलाम जिले के हथनारा गांव का निवासी है। करीब दस साल पहले वह भाजपा नेता रघुनाथ सिंह बब्बू के यहां ड्राइवर था। बाद में उसने एक स्कूल भी खोला, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते 2021 में उसे बंद करना पड़ा। इसके बाद वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय हो गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, 2022 में वह आर्म्स एक्ट के मामले में तिहाड़ जेल में करीब सात महीने तक बंद रहा। इसी दौरान उसका संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग से हुआ। दिल्ली में नादिर शाह हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था, जिसमें बाद में वह सरकारी गवाह बन गया। इसके अलावा महाराष्ट्र के नांदेड़ के व्यापारी संजय बियानी हत्याकांड में रेकी करने और मध्य प्रदेश के सेंधवा क्षेत्र से एक व्यापारी के अपहरण के मामले में भी उसका नाम जुड़ चुका है।

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