दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया है। गुरुवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई, हालांकि सजा के तुरंत बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई। कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश (धारा 120B) और धोखाधड़ी व जालसाजी (धारा 420, 467, 468, 471) के तहत दोषी पाया। इस मामले में बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है।
फर्जी दस्तावेजों से निकाला गया ब्याज
फर्जी दस्तावेजों से निकाला गया ब्याज
मामले की शुरुआत 1998 में हुई, जब श्याम सुंदर संस्थान की अध्यक्ष सावित्री श्याम ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष और संस्थान के ट्रस्टी भी थे। आरोप है कि उन्होंने बैंक लिपिक के साथ मिलकर रिकॉर्ड में हेरफेर कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी। इसके बाद 1999 से 2011 के बीच 13.5% ब्याज दर से हर साल 1.35 लाख रुपए निकाले गए।
2011 में सामने आया मामला
2011 में सामने आया मामला
साल 2011 में भाजपा नेता पप्पू पुजारी के बैंक अध्यक्ष बनने के बाद इस मामले का खुलासा हुआ। जांच में ऑडिट आपत्ति दर्ज की गई, जिसके चलते 2012 में एफडी भुगतान रोक दिया गया। भुगतान न मिलने पर मामला उपभोक्ता फोरम से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर ने आपराधिक मामला दर्ज कराने की पहल की।
विधायकी पर खतरा, हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद
विधायकी पर खतरा, हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में 3 साल की सजा के चलते राजेंद्र भारती की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, उन्हें अपील के लिए 60 दिन का समय मिलेगा। यदि हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन मिल जाता है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है।
राजनीतिक हलचल तेज, उपचुनाव की संभावना
राजनीतिक हलचल तेज, उपचुनाव की संभावना
विधायक के बेटे अनुज भारती के अनुसार, उनके पिता को जेल भेज दिया गया है और वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इधर, फैसले के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यदि सजा बरकरार रहती है और सीट खाली होती है, तो यहां उपचुनाव कराए जाने की संभावना है।