स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, सभी जरूरी प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और रिजल्ट को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इस वर्ष करीब 16 लाख छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुए थे, इसलिए समय पर परिणाम जारी करना विभाग की प्राथमिकता है।
16 लाख से ज्यादा छात्रों ने दी परीक्षा
प्रदेशभर में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग 9.07 लाख छात्र 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा संचालन के लिए राज्य में 3856 केंद्र बनाए गए थे।
नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम
परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए इस बार फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी निगरानी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इसके बावजूद प्रदेशभर में करीब 100 नकल प्रकरण सामने आए। इनमें मुरैना में सबसे ज्यादा 41 और भोपाल में 20 मामले दर्ज किए गए।
रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि कॉपियों की जांच के बाद अब क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों और काउंसलर्स ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि रिजल्ट के दौरान तनाव से बचें। बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक सहयोग दें। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और सकारात्मक माहौल बेहतर परिणाम में मदद करते हैं।
समय पर रिजल्ट से मिलेगी राहत
शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि परिणाम समय पर घोषित किए जाएं, ताकि छात्र बिना देरी के अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। तय समयसीमा में रिजल्ट जारी होने पर यह लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।