तड़के होने वाली भस्म आरती में भाग लेने के बाद धर्मेंद्र प्रधान करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर ध्यान में लीन रहे। इस दौरान मंदिर परिसर में गूंजते वैदिक मंत्र, ढोल-नगाड़ों की ध्वनि और भक्तिमय वातावरण ने पूरे अनुभव को आध्यात्मिक बना दिया।
आरती के बाद केंद्रीय मंत्री ने गर्भगृह में भगवान महाकाल का अभिषेक कर देश की उन्नति, समाज की समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि भस्म आरती का अनुभव आत्मिक संतोष देने वाला होता है और यह आंतरिक शांति व ऊर्जा का स्रोत है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में शांति और सद्भाव की आवश्यकता पहले से अधिक है। ऐसे समय में भगवान महाकाल के चरणों में उन्होंने देश की प्रगति, सनातन संस्कृति के विस्तार और विश्व कल्याण की प्रार्थना की।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उज्जैन में श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें गौसेवा का अवसर मिला, जिसे उन्होंने भारतीय संस्कृति की करुणा और लोकमंगल की भावना का प्रतीक बताया।