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बेंगलुरु में एनएच 44 का डिजाइन खराब, रखरखाव पर भी नहीं दिया जाता ध्यान: किरण मजूमदार-शॉ


नई दिल्ली। फार्मा कंपनी बायोकॉन लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरमैन किरण मजूमदार-शॉ ने रविवार को एनएच 44 की डिजाइन और रखरखाव को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई और कहा कि कई बार शिकायत करने के बाद भी इस मुद्दे का समाधान नहीं किया जा रहा है।

एनएच 44, बेंगलुरु को होसुर से जोड़ने वाला प्रमुख आईटी कॉरिडोर है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “पूरे देश में एनएचएआई अपने सड़क बुनियादी ढांचे की प्रशंसा करता है, फिर भी देश का प्रमुख आईटी कॉरिडोर एनएच44 (पूर्व में एनएच7) यानी होसुर रोड इतनी घटिया ढंग से डिजाइन किया गया और इसका रखरखाव खराब क्यों है?”

उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, “ये देखने में बेहद खराब है – डिवाइडर और बैरिकेड्स की हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है और फुटपाथ पर डामर नहीं बिछा है।”

आगे उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को टैग करते हुए लिखा कि सालों से कई शिकायतें करने के बावजूद, यहां कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

इसके साथ ही उन्होंने एनएचएआई को टैग करते हुए लिखा, “क्या यही वह रिकॉर्ड है जिसे एनएचएआई गौरवशाली मानता है?”

इस पहले भी, देश की प्रमुख महिला उद्योगपति में शामिल शॉ ने पिछले साल देश में, विशेषकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में, कचरे की बढ़ती समस्या पर गंभीर चिंता जताई थी।

पिछले साल अक्टूबर में एक एक्स पोस्ट में, उन्होंने इन शहरों की नगरपालिकाओं और राज्य सरकारों की इस मुद्दे के प्रति घोर अज्ञानता और लापरवाही की कड़ी आलोचना की थी। यह समस्या हाल ही में चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

भारत की सबसे धनी महिलाओं में शामिल शॉ पहली पीढ़ी की कारोबारी है और उन्होंने 1978 में बायोफार्मास्युटिकल फर्म बायोकॉन की स्थापना की थी। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ करीब 3.2 अरब डॉलर है।

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