लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह पहल अमेरिकी मध्यस्थता से हुई है और इसमें लेबनान में अमेरिकी राजदूत भी शामिल थे। दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क बेहद दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि उनके बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह संपर्क अमेरिकी नेतृत्व में हुआ, जिसका उद्देश्य संघर्षविराम लागू करना और दोनों पक्षों को वार्ता की मेज तक लाना था।
लेबनानी अधिकारियों का दावा है कि Hezbollah के खिलाफ इजरायली कार्रवाई में करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है और 6300 से अधिक घायल हुए हैं। इनमें हाल के हमलों में हुई सैकड़ों मौतें भी शामिल बताई जा रही हैं।
1948 से जारी है टकराव
इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष का इतिहास 1948 से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच समय-समय पर झड़पें होती रही हैं।
दक्षिणी लेबनान क्षेत्र में तनाव लगातार बना रहता है, जहां ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह सक्रिय है और यह इलाका इजरायल की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में 14 अप्रैल की प्रस्तावित वार्ता को क्षेत्रीय शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।