मुंबई। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण टालने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आखिरी कानूनी चाल चल दी है। उसने फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECtHR) में ‘रूल 39’ के तहत याचिका दायर कर अपने प्रत्यर्पण पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की है।
इससे पहले लंदन उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को नीरव मोदी की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण केस को दोबारा खोलने की मांग की थी। इस फैसले के बाद ब्रिटेन में उसके पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा था, जिसके चलते उसने यूरोपियन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
नियमों के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तय समयसीमा के भीतर उसे भारत ला सकती थी, लेकिन ‘रूल 39’ की अर्जी लंबित रहने तक प्रत्यर्पण पर रोक लग गई है।
‘रूल 39’ यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का एक आपातकालीन प्रावधान है, जिसके तहत अदालत किसी व्यक्ति को “अपरिवर्तनीय नुकसान” से बचाने के लिए अंतरिम आदेश जारी कर सकती है।
कोई खुली सुनवाई नहीं होती: पूरा मामला लिखित दलीलों के आधार पर तय होता है
48 घंटे में फैसला संभव: आमतौर पर जज जल्द निर्णय देते हैं
अस्थायी राहत मिलती है: अंतिम फैसला नहीं, सिर्फ रोक लगाने का अंतरिम उपाय
प्रत्यर्पण पर रोक: जब तक अर्जी पर फैसला नहीं, तब तक संबंधित देश व्यक्ति को नहीं भेजता
विशेषज्ञों के मुताबिक, याचिकाकर्ता को यह साबित करना होता है कि उसे तुरंत और गंभीर नुकसान का खतरा है, और उसने अपने देश में सभी कानूनी विकल्प इस्तेमाल कर लिए हैं।
लंबी खिंच सकती है कानूनी प्रक्रिया
‘रूल 39’ के तहत मिली राहत स्थायी नहीं होती, लेकिन इससे मामला वर्षों तक खिंच सकता है।
क्या होगा आगे?
फिलहाल क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने भी पुष्टि की है कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तय थी, लेकिन अब यूरोपीय अदालत में दाखिल अर्जी के चलते इस पर अस्थायी ब्रेक लग गया है।
कुल मिलाकर, नीरव मोदी ने एक ऐसा कानूनी रास्ता चुना है जो भले ही अंतिम तौर पर उसे राहत दिलाए या न दिलाए, लेकिन भारत लाए जाने की प्रक्रिया को फिलहाल टालने में जरूर असरदार साबित हो सकता है।