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अभिनेता प्रशांत तमांग के निधन और गलवान संघर्ष से जुड़े संदर्भों को हटाने के कारण फिल्म के 40 प्रतिशत हिस्से की दोबारा शूटिंग की गई है।


नई दिल्ली : बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म मातृभूमि इन दिनों फिल्म गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म की रिलीज को लेकर दर्शकों में भारी उत्साह था, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने इसके प्रदर्शन पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। जानकारी के अनुसार फिल्म की रिलीज डेट को आगे बढ़ा दिया गया है और इसके पीछे कई गंभीर कारण बताए जा रहे हैं। मूल रूप से अप्रैल के महीने में रिलीज होने वाली यह फिल्म अब तकनीकी और रचनात्मक बदलावों के दौर से गुजर रही है, जिसके चलते निर्माता फिलहाल किसी नई तारीख की घोषणा करने की स्थिति में नहीं हैं।

महत्वपूर्ण कलाकार का निधन और प्रोडक्शन की चुनौतियां
फिल्म की देरी का एक सबसे बड़ा और दुखद कारण फिल्म के मुख्य खलनायक की भूमिका निभा रहे अभिनेता और गायक प्रशांत तमांग का असामयिक निधन बताया जा रहा है। प्रशांत ने फिल्म के एक बड़े हिस्से की शूटिंग पूरी कर ली थी, लेकिन क्लाइमेक्स और कुछ महत्वपूर्ण एक्शन दृश्यों की शूटिंग अभी बाकी थी। उनके जाने से फिल्म की कहानी में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। प्रोडक्शन टीम अब इस उलझन में है कि उन दृश्यों को किसी अन्य कलाकार के साथ दोबारा फिल्माया जाए या फिर आधुनिक तकनीक और एआई की मदद से उन्हें पूरा किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल अतिरिक्त समय लग रहा है, बल्कि बजट पर भी भारी दबाव पड़ रहा है।

कहानी में बदलाव और रक्षा मंत्रालय के सुझाव
प्रशांत तमांग के निधन के अलावा फिल्म की विषयवस्तु में किए जा रहे बदलाव भी इसकी देरी का एक मुख्य कारण हैं। शुरुआत में यह फिल्म 2020 के गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित थी और इसका शीर्षक बैटल ऑफ गलवान रखा गया था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों और संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने फिल्म से चीन और गलवान के सीधे संदर्भों को हटाने का सुझाव दिया था। इसके बाद निर्माताओं ने न केवल फिल्म का नाम बदलकर मातृभूमि किया, बल्कि इसकी कहानी को भी युद्ध के बजाय मानवीय संवेदनाओं और शांति की ओर मोड़ दिया। फिल्म के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से को दोबारा फिल्माया गया है ताकि इसे एक काल्पनिक और भावनात्मक ड्रामा के रूप में पेश किया जा सके।

सेंसर बोर्ड और आधिकारिक मंजूरी का इंतजार
फिल्म में किए गए इन व्यापक बदलावों के कारण इसे अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास भी नहीं भेजा गया है। रक्षा मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अभी जारी है। जब तक फिल्म को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक इसका सिनेमाघरों तक पहुंचना नामुमकिन है। सलमान खान और निर्देशक अपूर्व लाखिया फिल्म की गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते, इसलिए वे हर पहलू पर बारीकी से काम कर रहे हैं। इस प्रशासनिक देरी ने वितरकों और प्रशंसकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

बड़े पर्दे पर रिलीज की प्रतिबद्धता
तमाम अड़चनों के बावजूद सलमान खान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मातृभूमि को सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं किया जाएगा। वह इस फिल्म को बड़े पर्दे के अनुभव के लिए ही उपयुक्त मानते हैं और सिनेमाघरों में ही इसे रिलीज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फिल्म में चित्रांगदा सिंह भी एक अहम भूमिका में नजर आएंगी। ताजा रिपोर्टों की मानें तो अब इस फिल्म को अगस्त के महीने या स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज करने की योजना बनाई जा रही है। तब तक निर्माताओं को उम्मीद है कि वे सभी तकनीकी और विनियामक बाधाओं को पार कर लेंगे और दर्शकों को एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव प्रदान करेंगे।

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