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Pakistan Economy Crisis : आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान सऊदी अरब ने दी बड़ी राहत, विदेशी कर्ज पर फिर बढ़ा फोकस

Pakistan Economy Crisis : नई दिल्ली । पाकिस्तान एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी कर्ज के दबाव में फंसता नजर आ रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विदेश दौरे के दौरान सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देकर बड़ी राहत दी है। यह मदद ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पर संयुक्त अरब अमीरात का भारी कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक यूएई को करीब 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस करना है, जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है। इसी दबाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब सहित अन्य मित्र देशों से सहायता की गुहार लगाई थी।

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई है। बताया जा रहा है कि यह राशि 15 अप्रैल 2026 की वैल्यू डेट पर जमा की गई है, जो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को अस्थायी मजबूती देती है।

इसके अलावा सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर जमा देने का भी आश्वासन दिया है और अपनी मौजूदा 5 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को तीन साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इससे पाकिस्तान को अल्पकालिक आर्थिक दबाव से कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत स्थायी समाधान नहीं है क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही उच्च महंगाई, सीमित विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते बाहरी कर्ज के बोझ से जूझ रही है। मार्च के अंत तक पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 16.4 अरब डॉलर बताए गए हैं, जो मुश्किल से तीन महीने के आयात को कवर कर सकते हैं।

इससे पहले पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात के साथ 3.5 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को आगे बढ़ाने में भी असफल रहा था, जिसे पिछले कई वर्षों में पहली बड़ी नाकामी माना जा रहा है। इसी कारण देश की शॉर्ट टर्म फंडिंग जरूरतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय बाजार की सख्ती ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वहीं आईएमएफ समर्थित सुधार कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को लगातार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दबाव भी झेलना पड़ रहा है। फिलहाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बाहरी फंडिंग पर काफी हद तक निर्भर दिखाई दे रही है और ऐसे में मित्र देशों से मिलने वाली मदद ही उसकी अल्पकालिक स्थिरता का आधार बनी हुई है।

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