पूरा मामला शनिवार देर रात का बताया जा रहा है। ग्वालियर की आर.के. कंपनी की किचन में काम करने वाले वेंडर अमित धाकरे और राघव सिंह बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस में ऑर्डर का खाना सप्लाई करने जा रहे थे। दोनों वेंडरों के पास IRCTC द्वारा जारी वैध पहचान पत्र भी मौजूद था। इसके बावजूद GRP कर्मियों द्वारा उन्हें रोके जाने और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
पीड़ित वेंडरों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें रोका और उसके बाद उनके साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस घटना में दोनों वेंडरों को गंभीर चोटें आईं। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी रहा। घटना के बाद स्टेशन परिसर में भी कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
घटना की जानकारी जैसे ही सामने आई मामला ग्वालियर से लेकर भोपाल तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय जांच दल तत्काल ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंचा और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच के आधार पर GRP ब्रॉडगेज और नैरोगेज थानों में तैनात आरक्षक योगेश जाट मनोज जाट आशीष चौरसिया विकास सोलंकी नमन कुमार और निहाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई GRP पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा द्वारा की गई है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और भी कठोर कार्रवाई संभव है।
वहीं दूसरी ओर इस घटना को लेकर वेंडरों और उनके परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय पर और निष्पक्ष जांच नहीं होती तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
यह पूरा मामला रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आम लोगों का कहना है कि यदि वैध पहचान पत्र होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं होती हैं तो सिस्टम में सुधार की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।