जानकारी के अनुसार कारखाने में एक बड़े पानी के टैंकर पर रंगाई पुताई का काम चल रहा था। इसी दौरान मजदूर अरमान और गुलाब अनुरागी टैंकर के अंदर जाकर पेंटिंग कर रहे थे। काम के दौरान अचानक दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते वे बेहोश होकर गिर पड़े। वहां मौजूद अन्य लोगों को पहले समझ ही नहीं आया कि आखिर क्या हुआ लेकिन कुछ ही क्षणों में स्थिति गंभीर हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टैंकर के भीतर पेंटिंग के दौरान जहरीली गैस और केमिकल की गंध तेजी से फैल गई थी जिससे मजदूरों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। बंद जगह होने के कारण उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका और दम घुटने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। घटना के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और कारखाने के अन्य कर्मचारियों ने तुरंत दोनों को बाहर निकालने की कोशिश की।
कारखाने के मालिक द्वारा तत्काल दोनों मजदूरों को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर डॉक्टरों ने मौत की वजह दम घुटना बताया है हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। दोनों शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
यह हादसा औद्योगिक कार्यस्थलों पर सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गंभीर तस्वीर पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद टैंकर या सीमित स्थानों में काम करते समय पर्याप्त वेंटिलेशन और सुरक्षा उपकरणों का होना बेहद जरूरी है लेकिन अक्सर इन नियमों की अनदेखी की जाती है जो इस तरह की घटनाओं को जन्म देती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो शायद इन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना एक चेतावनी है कि काम के दौरान लापरवाही और सुरक्षा की अनदेखी किस तरह घातक साबित हो सकती है।