फ्यूल बचाने के लिए नई रणनीति तैयार
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने बायोगैस स्टोव्स की खरीद का ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके साथ ही जवानों की मूवमेंट को 400 किलोमीटर के दायरे तक सीमित करने की योजना बनाई गई है, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव बिना किसी ऑपरेशनल क्षमता को प्रभावित किए लागू किया जाएगा।
वाहनों की पूलिंग और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर जोर
सेना अब वाहनों की पूलिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, यानी एक साथ कई कार्यों को एक यात्रा में पूरा करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी के उपयोग को भी बढ़ाने की योजना है। कुछ नियम पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि बाकी अगले एक-दो हफ्तों में लागू किए जाएंगे।
हवाई गतिविधियों में भी कटौती
फ्यूल बचाने के लिए सेना से जुड़ी कुछ उड़ानों को भी सीमित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम रणनीतिक जरूरतों को प्रभावित किए बिना ईंधन खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
सौर और पवन ऊर्जा पर बड़ा फोकस
सेना की योजना आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर सोलर प्लांट और पवन चक्कियों की स्थापना करने की है। अनुमान के मुताबिक, सेना में रोजाना लगभग 1,56,000 किलो कुकिंग गैस की खपत होती है, जिसमें बायोगैस के इस्तेमाल से लगभग 20% तक बचत संभव है। वहीं, करीब 2 लाख वाहनों के चलते बड़ी मात्रा में ईंधन खर्च होता है।
पांच साल का हरित ऊर्जा मिशन
सेना का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में खाली और उपयोग न हो रहे क्षेत्रों में सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाए जाएं, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटे।
होर्मुज जलमार्ग से गुजरता भारतीय टैंकर सुरक्षित
इसी बीच एक अहम घटनाक्रम में भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर मुंबई की ओर बढ़ रहा है। यह वही संवेदनशील जलमार्ग है, जहां हाल ही में तनाव की स्थिति देखने को मिली थी। इस टैंकर पर 31 भारतीय नाविक सवार हैं और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।