कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।
सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।
इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।